देहरादून-सहस्त्रधारा में रात को बादल फटने से भारी तबाही हुई है। करलीगाड़ नाले का पानी अचानक उफान पर आ गया, जिससे नज़दीकी दुकानों और घरों को बहा देना पड़ा। फन वैली तथा देहरादून-हरिद्वार नेशनल हाईवे पर स्थित पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है और तपकेश्वर महादेव मंदिर के परिसर में मलबा जमा हो गया है। कई वाहन नदी के प्रवाह में बह गए और दो लोग लापता हैं। जिला प्रशासन, SDRF, NDRF और ज़मीनी विभागों ने बचाव कार्य शुरू कर दिया है। देहरादून के स्कूल बंद कर दिए गए हैं क्योंकि स्थिति गंभीर है।
हिमाचल प्रदेश में भी हाल बेहाल है। धरमपुर (मंडी जिला) में बड़े पैमाने पर बारिश के कारण बस स्टैंड पूरी तरह जलमग्न हो गया, कई वाहन बह गए। मंडी, शिमला और आसपास के इलाकों में भूस्खलन व बाढ़ से सड़कें बंद हैं। बिजली ट्रांसफॉर्मर और पानी की आपूर्ति योजनाएँ प्रभावित हुई हैं। सन्निहित क्षेत्रों में राहत कार्य और बचाव अभियान तेज कर दिए गए हैं।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार मॉनसून लगभग समाप्त हो गया है लेकिन वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और मॉनसून के अवशेष अभी भी सक्रिय हैं। ग्लोबल वार्मिंग व नमी में बढ़ोतरी से इन घटनाओं की तीव्रता बढ़ रही है। अनियोजित निर्माण और जंगल कटाई ने भूस्खलन एवं बाढ़ की आशंका को और बढ़ा दिया है।
