केरल के प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर से जुड़ा सोने का घोटाला इन दिनों सुर्खियों में है। मामला मंदिर की द्वारपालक मूर्तियों पर किए गए सोने के आवरण से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार 2019 में इन मूर्तियों पर 42.8 किलो सोने की परत चढ़ाई गई थी, लेकिन हाल ही में हुई जांच में यह वजन घटकर 38.258 किलो पाया गया। यानी लगभग 4.54 किलो सोना गायब है। इस खुलासे के बाद भक्तों में गुस्सा और आक्रोश है, क्योंकि यह सोना श्रद्धालुओं की आस्था और दान से जुड़ा हुआ था।
हाई कोर्ट ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड को फटकार लगाई है और कहा है कि मंदिर से जुड़ी संपत्ति और चढ़ावे की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। कोर्ट ने बोर्ड से सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड तीन हफ्तों के भीतर पेश करने के आदेश दिए हैं और साथ ही सतर्कता विभाग को विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया है।
इस घटना ने राज्य की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। विपक्ष का आरोप है कि बोर्ड की लापरवाही और भ्रष्टाचार के चलते भगवान अयप्पा के मंदिर की पवित्रता पर दाग लगा है। वहीं, देवस्वोम बोर्ड का कहना है कि वह मामले की पारदर्शी जांच में सहयोग करेगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
भक्तों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि जांच सीबीआई या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उनका कहना है कि भगवान अयप्पा के मंदिर में सोने का गायब होना केवल वित्तीय घोटाला नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं के साथ खिलवाड़ भी है।
अब सबकी निगाहें हाई कोर्ट और जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि आखिर 4.54 किलो सोना कहां और कैसे गायब हुआ। यह मामला न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील है, बल्कि केरल की प्रशासनिक ईमानदारी और जवाबदेही की भी परीक्षा है।
