दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2025-26 में NSUI का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा। उन्हें सिर्फ उपाध्यक्ष पद ही जीतने में सफलता मिली, बाकी जैसे अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव की दौड़ में उन्हें हार झेलनी पड़ी।
अध्यक्ष की उम्मीदवार जोसलीन चौधरी की हार को सबसे ज़्यादा झटका माना गया। शुरुआत में उनका प्रचार अच्छा था, लेकिन बाद में उन्होंने जमीन पर ज़रूरी समर्थन नहीं हासिल किया।
एक बड़ी वजह ये भी रही कि बताया जा रहा है कि जोसलीन को पैराशूट उम्मीदवार के रूप में टिकट मिला, यानी संगठन में ज़्यादा समय नहीं गुज़ारा और स्थानीय कार्यकर्ताओं ने उन पर भरोसा नहीं किया।
एक अन्य NSUI की नेता, उमांशी लांबा, ने चुनाव लड़ने का फैसला बग़ावत स्वरूप किया; उन्होंने खुद को ‘पीड़ित’ दिखाया, और आरोप लगाया कि संगठन ने उन्हें सही योगदान या समर्थन नहीं दिया।
जमीनी स्तर पर प्रचार की कमी, कार्यकर्ताओं का सही से जुटना नहीं, आंतरिक कलह और संगठनात्मक कमज़ोरियाँ NSUI के लिए बहुत भारी पड़ीं।
वहीं दूसरी ओर, आर्यन मान को फायदा हुआ क्योंकि वे स्थानीय जाट समुदाय से हैं और उनकी पहचान वहीं है। यह चुनाव क्षेत्र में जात-समुदाय का रोल अभी भी अहम है।
