केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को कई बड़े फैसले लिए जिनका सीधा असर रेलवे कर्मचारियों और समुद्री क्षेत्र पर पड़ेगा। सरकार ने करीब 10.90 लाख रेलवे कर्मचारियों के लिए उत्पादकता आधारित बोनस यानी पीएलबी को मंजूरी दी है। यह बोनस 78 दिनों के हिसाब से तय किया गया है और इसकी कुल राशि लगभग 1,865.68 करोड़ रुपये होगी। दिवाली से पहले यह रकम कर्मचारियों के खातों में पहुंचाई जाएगी ताकि त्योहार पर उन्हें सीधा लाभ मिल सके। यह फैसला लंबे समय से रेलवे यूनियनों की मांग पर लिया गया है और इससे कर्मचारियों में उत्साह बढ़ने की उम्मीद है।
सरकार ने इसके साथ ही जहाज निर्माण और समुद्री उद्योग को नई ऊर्जा देने के लिए 69,725 करोड़ रुपये के रिफॉर्म पैकेज को भी मंजूरी दी है। इस पैकेज का मकसद घरेलू शिपबिल्डिंग क्षमता को मजबूत करना, समुद्री वित्त और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को बढ़ावा देना और इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना है। यह कदम आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।
इसके अलावा कैबिनेट ने बिहार के बख्तियारपुर से राजगीर होते हुए तिलैया तक लगभग 104 किलोमीटर लंबे रेल खंड को डबल लाइन करने की भी मंजूरी दी है। इस परियोजना पर 2,192 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसके पूरा होने से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर होगी, ट्रेनों की आवाजाही तेज और सुविधाजनक होगी तथा माल ढुलाई क्षमता में भी इजाफा होगा।
इन फैसलों से एक तरफ रेलवे कर्मचारियों को आर्थिक लाभ मिलेगा तो दूसरी तरफ शिपबिल्डिंग क्षेत्र में निवेश और अवसरों के नए दरवाजे खुलेंगे। वहीं, बिहार की रेल परियोजना से स्थानीय विकास और रोजगार को भी मजबूती मिलेगी। कुल मिलाकर ये निर्णय सरकार की उस नीति को दर्शाते हैं जिसमें कर्मचारियों के कल्याण, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार को एक साथ संतुलित करने की कोशिश की गई है।
