यह पूरा मामला उस समय सामने आया जब तेजस्वी यादव की “बिहार अधिकार यात्रा” के दौरान उनकी अनुपस्थिति में पार्टी के करीबियों में शामिल संजय यादव को फ्रंट सीट पर बैठने का अवसर मिला। आलोक कुमार नामक पार्टी कार्यकर्ता ने अपनी फेसबुक पोस्ट में यह बात उठायी कि तेजस्वी की कुर्सी पर कोई और कैसे बैठ सकता है। इस पोस्ट को रोहिणी ने बिना किसी टिप्पणी के अपने सोशल मीडिया पेज पर शेयर किया, जिससे विवाद ने गति पकड़ी।
इस घटना के बाद रोहिणी आचार्य भावनात्मक रूप से आहत हुईं और सिंगापुर लौट गयीं। रोहिणी ने फ़ोन कॉल द्वारा घटना पर पिता लालू प्रसाद यादव से बातचीत की, जिसमें उन्हें यह महसूस हुआ कि परिवार और पार्टी में संजय यादव की भूमिका बढ़ती जा रही है और वे उपेक्षित महसूस कर रही हैं।
रोहिणी ने सोशल मीडिया पर यह भी लिखा कि उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है, न विधानसभा चुनाव लड़ने की चाह है और न किसी पद की लालसा है; उनके लिए आत्मसम्मान सर्वोपरि है। इसके पश्चात् उन्होंने अपना “X” (पूर्व में Twitter) अकाउंट प्राइवेट कर दिया ताकि उनकी पोस्ट केवल उन लोगों द्वारा देखी जाएँ जो उन्हें फॉलो करते हैं।
तेज प्रताप यादव ने सार्वजनिक रूप से रोहिणी के समर्थन में बोलते हुए कहा कि रोहिणी ने जो कहा है वह बिल्कुल सही है, और “जो रोहिणी जी ने कहा वह सच्चाई है।” उन्होंने इस विवाद में महिला स्वाभिमान की बात उठायी और कहा कि “जो रोहिणी जी ने कहा वह सराहनीय है।”
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब बिहार में चुनाव की रणनीतियाँ बन रही हैं और राजद के अंदरूनी एकता जनता के सामने एक बड़ी चिंता का विषय है।
