बिहार चुनाव 2025: अमित शाह की रणनीति, कुर्मी-कुशवाहा-धानुक पर भाजपा का बड़ा दांव

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अपनी रणनीति में जातिगत समीकरणों को केंद्र में रखा है। अमित शाह ने इस बार विशेष रूप से तीन जातियों—कुर्मी, कुशवाहा और धानुक—पर फोकस करने का निर्णय लिया है। ये तीनों जातियाँ बिहार की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाती रही हैं क्योंकि इनकी जनसंख्या पर्याप्त है और वे कई विधानसभा क्षेत्रों में परिणाम बदलने की ताकत रखती हैं।


भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि पिछली बार 2020 के चुनाव में इन जातियों के उम्मीदवारों ने लगभग सौ फीसदी सफलता दिलाई थी। हाजीपुर, अमनौर, बछबारा, बिहारशरीफ, रक्सौल और प्राणपुर जैसी सीटों पर इन समुदायों के प्रत्याशी विजयी रहे थे। यही कारण है कि पार्टी इस बार इन जातियों को और अधिक प्रतिनिधित्व देने की तैयारी में है।


दानापुर, अरवल और मुंगेर जैसे क्षेत्रों में भाजपा की नजर खास तौर पर टिकी है क्योंकि इन इलाकों में कुर्मी-कुशवाहा-धानुक मतदाता बड़ी संख्या में मौजूद हैं। पार्टी का मानना है कि यदि इन्हें टिकट देकर सही तरह से साधा जाए तो न केवल इनकी निष्ठा भाजपा के साथ मजबूत होगी बल्कि विपक्ष के वोट बैंक पर भी असर पड़ेगा।


अमित शाह की रणनीति का एक और पहलू यह है कि बिहार में ‘लव-कुश’ समीकरण (कुर्मी और कुशवाहा समुदाय का गठजोड़) पहले से ही प्रभावी रहा है। जब-जब यह समीकरण एकजुट होकर किसी दल के साथ खड़ा हुआ है, सत्ता का समीकरण उसी के पक्ष में पलट गया है। भाजपा चाहती है कि इस समीकरण में धानुक समाज को भी जोड़कर एक नया और मजबूत सामाजिक गठबंधन खड़ा किया जाए।


इस रणनीति के पीछे पार्टी की सोच स्पष्ट है—बिहार की राजनीति में जाति आधार सबसे निर्णायक तत्व है। भाजपा जानती है कि अगर इन तीन जातियों का भरोसा जीत लिया गया तो नतीजों पर इसका बड़ा असर पड़ेगा और विपक्ष के लिए चुनावी चुनौती और कठिन हो जाएगी।

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