हाल के वर्षों में मेडिकल साइंस ने ऐसी तकनीकों पर काम तेज किया है, जो बीमारी होने से पहले ही उसके संकेत पकड़ सके। इसी कड़ी में ब्रिटेन के सरे विश्वविद्यालय (University of Surrey) के वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण अध्ययन किया है, जिसमें दावा किया गया है कि एक साधारण ब्लड टेस्ट भविष्य में होने वाले गंभीर रोगों और यहां तक कि जीवन की संभावित अवधि (life expectancy) के बारे में भी संकेत दे सकता है।
इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह समझना था कि क्या खून में पहले से ऐसे जैविक संकेत (biomarkers) मौजूद होते हैं, जो आने वाले वर्षों में सेहत और मृत्यु जोखिम (mortality risk) की जानकारी दे सके। वैज्ञानिकों का मानना है कि शरीर के अंदर चल रही जैविक प्रक्रियाओं की सबसे स्पष्ट झलक प्रोटीन के स्तर से मिलती है। इसलिए शोध का फोकस खून में मौजूद अलग-अलग प्रोटीन पर रखा गया।
प्रोटीन हमारे शरीर की लगभग हर प्रक्रिया में शामिल होते हैं—चाहे वह इम्यून सिस्टम हो, मेटाबॉलिज्म, सूजन (inflammation) या कोशिकाओं की मरम्मत। जब शरीर में कोई गड़बड़ी शुरू होती है, तो कई बार उसके शुरुआती संकेत प्रोटीन के स्तर में बदलाव के रूप में सामने आते हैं। इसी कारण वैज्ञानिकों ने खून में मौजूद सैकड़ों प्रोटीन का विश्लेषण किया।
अध्ययन में प्रतिभागियों की उम्र, बॉडी मास इंडेक्स (BMI), स्मोकिंग जैसी आदतें और जीवनशैली को भी ध्यान में रखा गया है। इसके बाद शोधकर्ताओं ने सैकड़ों ऐसे प्रोटीन पहचाने हैं, जिसका संबंध कैंसर, हृदय रोग और किसी भी कारण से होने वाली मृत्यु के जोखिम से पाया गया है। इसमें से कुछ विशेष प्रोटीन को चुनकर दो प्रोटीन पैनल बनाया गया है। पहला पैनल- 10 प्रोटीन, जो अगले 10 वर्षों में मृत्यु के कुल जोखिम का संकेत देता है। दूसरा पैनल- 6 प्रोटीन, जो अगले 5 वर्षों के जोखिम को दर्शाता है।
अब तक डॉक्टर उम्र, लाइफस्टाइल और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर जोखिम का अनुमान लगाते थे। लेकिन इस अध्ययन में विकसित किए गए प्रोटीन पैनल वाले मॉडल इन पारंपरिक तरीकों से ज्यादा सटीक साबित हुआ है। हालांकि वैज्ञानिकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सुधार बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन भविष्य में बेहतर और व्यक्तिगत इलाज (personalized medicine) की दिशा में यह एक अहम कदम है।
यह तकनीक अभी शुरुआती दौर में है और इसे आम जांच का हिस्सा बनने में समय लगेगा। फिर भी, यह शोध भविष्य में बीमारी की पहले चेतावनी देने वाली प्रणाली (early warning system) विकसित करने में मदद कर सकता है, जिससे समय रहते इलाज संभव हो सके।
