बिहार सरकार ने राज्य में परिवहन ढांचे को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पेट्रोल पंपों, ढाबों और रेस्टोरेंट्स पर इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देगा, बल्कि निजी निवेश, रोजगार और पर्यावरण संरक्षण, तीनों लक्ष्यों को साधने में सहायक होगा।
मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि राज्यभर में रणनीतिक स्थानों पर चार्जिंग प्वाइंट लगाए जाएं। पेट्रोल पंपों और हाईवे ढाबों को प्राथमिकता देने से लंबी दूरी के यात्रियों और व्यावसायिक वाहनों को सुविधा मिलेगी। इससे ईवी अपनाने में आने वाली ‘रेंज एंग्जायटी’ की समस्या भी कम होगी।
चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने से निजी निवेश आकर्षित होगा। ढाबों, रेस्टोरेंट्स और पंप मालिकों के लिए यह अतिरिक्त आय का स्रोत बनेगा। स्थापना, संचालन और रखरखाव में तकनीकी कर्मियों, इलेक्ट्रिशियन और सेवा प्रदाताओं की जरूरत पड़ेगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा। स्टार्टअप्स और एमएसएमई के लिए भी नए अवसर खुलेगा।
उपमुख्यमंत्री ने रेखांकित किया है कि इलेक्ट्रिक वाहन पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहनों की तुलना में अधिक किफायती हैं। ईंधन लागत कम होती है और रखरखाव भी सस्ता पड़ता है। समय के साथ बैटरी तकनीक में सुधार और चार्जिंग नेटवर्क के विस्तार से ईवी आम नागरिकों के लिए और सुलभ होगा।
ईवी अपनाने से वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह पहल जलवायु परिवर्तन से निपटने में राज्य के प्रयासों को मजबूती देगी। शहरी क्षेत्रों में प्रदूषण घटेगा और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
सरकार की यह योजना बिहार को ई-मोबिलिटी के पथ पर तेजी से आगे ले जा सकती है। यदि चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का मानकीकरण, उचित टैरिफ और सार्वजनिक-निजी भागीदारी सुनिश्चित की जाए, तो राज्य में ईवी इकोसिस्टम मजबूत होगा। जागरूकता अभियानों और प्रोत्साहन योजनाओं के साथ यह पहल बिहार के परिवहन भविष्य को हरित और टिकाऊ बना सकती है।
