अंडों में हानिकारक रसायन ‘नाइट्रोफ्यूरान’ पाए जाने की खबरों के बाद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने देशभर में अंडों की व्यापक जांच कराने का फैसला लिया है। प्राधिकरण ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों को निर्देश दिया है कि वे बाजार से अंडों के सैंपल एकत्र कर उनकी प्रयोगशाला जांच कराएं, ताकि उपभोक्ताओं की सेहत से किसी भी तरह का समझौता न हो।
नाइट्रोफ्यूरान एक एंटीबायोटिक रसायन है, जिसका उपयोग पहले पशुपालन और पोल्ट्री में संक्रमण रोकने के लिए किया जाता था। हालांकि, वैज्ञानिक अध्ययनों में यह पाया गया है कि यह रसायन मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इसके सेवन से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसी कारण भारत समेत कई देशों में पशुओं और मुर्गियों के चारे में इसके इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है।
हाल ही में ‘एगोज’ ब्रांड के अंडों में कथित तौर पर नाइट्रोफ्यूरान पाए जाने की खबर सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है। सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि जांच के दौरान इस खतरनाक रसायन की मौजूदगी मिली है, जिससे उपभोक्ताओं में डर और असमंजस की स्थिति बन गई है। इसके बाद खाद्य सुरक्षा एजेंसियों पर कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
विवाद बढ़ने के साथ ही संबंधित कंपनी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। कंपनी का कहना है कि उसके उत्पाद सभी खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करता है और अंडों के उत्पादन में किसी भी प्रतिबंधित रसायन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। कंपनी ने यह भी दावा किया है कि वह स्वतंत्र प्रयोगशालाओं से अपने उत्पादों की नियमित जांच कराती है।
FSSAI ने स्पष्ट किया है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह वैज्ञानिक और पारदर्शी होगी। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया हैं कि वे अलग-अलग ब्रांडों और स्थानीय उत्पादकों के अंडों के नमूने लें। जांच रिपोर्ट के आधार पर यदि किसी भी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित उत्पादक या कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
खाद्य सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि उपभोक्ताओं को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। अंडे खरीदते समय भरोसेमंद स्रोतों और प्रमाणित ब्रांडों को प्राथमिकता देनी चाहिए। साथ ही, सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और रिपोर्ट्स पर ध्यान देना चाहिए।
अंडों में नाइट्रोफ्यूरान की आशंका ने एक बार फिर खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत को रेखांकित किया है। FSSAI का यह कदम न केवल उपभोक्ताओं की सेहत की रक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि यह खाद्य उत्पादकों को भी नियमों का सख्ती से पालन करने का संदेश देता है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट्स के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।
