बिहार सरकार चीनी मिलों के पुनर्परिचालन के लिए बनायी समिति - तीन विशेषज्ञ शामिल

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः चालू कराने और नई चीनी मिलों की स्थापना को गति देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस दिशा में गठित उच्चस्तरीय समिति में देश के तीन प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को विशेष सदस्य के रूप में शामिल किया गया है, ताकि उनके व्यापक अनुभव और तकनीकी विशेषज्ञता का सीधा लाभ बिहार के चीनी उद्योग को मिल सके।


समिति में जिन तीन विशेषज्ञों को नामित किया गया है, वे चीनी उद्योग और उससे जुड़े क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त हैं। इनमें शुगरकेन ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट, कोयम्बटूर के सेवानिवृत्त वैज्ञानिक और पद्मश्री सम्मान से अलंकृत डॉ. बक्शी राम, वर्द्धन सीबीजी के प्रबंध निदेशक अमित सिंह, तथा इंडियन शुगर मिल एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष मांडव प्रभाकर शामिल हैं। इन विशेषज्ञों की भागीदारी से नीति निर्माण, तकनीकी सुधार और निवेश को लेकर ठोस दिशा मिलने की उम्मीद है।


डॉ. बक्शी राम को गन्ना अनुसंधान और नई किस्मों के विकास के क्षेत्र में दशकों का अनुभव है। उनके मार्गदर्शन से बिहार में गन्ने की उत्पादकता बढ़ाने, बेहतर किस्मों के चयन और किसानों की आय में वृद्धि के लिए ठोस रणनीति बनाई जा सकेगी। इससे चीनी मिलों को गुणवत्तापूर्ण कच्चा माल उपलब्ध होगा।


वर्द्धन सीबीजी के प्रबंध निदेशक अमित सिंह बायो-एनर्जी और इथेनॉल उत्पादन के क्षेत्र में अनुभवी माने जाते हैं। उनकी विशेषज्ञता से चीनी मिलों को सह-उत्पाद आधारित मॉडल पर विकसित करने, जैसे इथेनॉल, बायोगैस और बिजली उत्पादन, में मदद मिलेगी। वहीं, मांडव प्रभाकर का अनुभव चीनी मिल प्रबंधन, उद्योग संगठन और नीति संवाद के क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा।


उल्लेखनीय है कि 8 दिसंबर को हुई समिति की बैठक में विशेषज्ञों को विशेष सदस्य के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया गया था। इस बैठक में बिहार में चीनी उद्योग की वर्तमान स्थिति, बंद मिलों की समस्याएं, किसानों के हित और निवेश की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।


विशेषज्ञों की सहभागिता से बिहार के चीनी उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल बंद पड़ी मिलों का पुनर्परिचालन संभव होगा, बल्कि नई चीनी मिलों की स्थापना, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती भी मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह पहल बिहार को फिर से चीनी उत्पादन के प्रमुख राज्यों की श्रेणी में लाने में सहायक सिद्ध होगी।



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