डिजिटल युग में सूचना जितनी तेजी से फैलती है, उतनी ही तेजी से अफवाहें भी समाज में भ्रम पैदा कर देती हैं। हाल के दिनों में सोशल मीडिया और कुछ गैर-जिम्मेदार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर यह दावा किया गया कि भारत में बिकने वाले अंडों में ‘नाइट्रोफ्यूरान’ नामक खतरनाक रसायन पाया जा रहा है, जो कैंसर का कारण बन सकता है। इस दावे ने आम जनता, विशेषकर बच्चों के माता-पिता, बुजुर्गों और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोगों में चिंता पैदा कर दी।
इसी संदर्भ में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने स्पष्ट शब्दों में इन दावों को “भ्रामक, डर फैलाने वाले और वैज्ञानिक रूप से निराधार” बताया है। प्राधिकरण ने कहा है कि भारत में उपलब्ध अंडे पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें पौष्टिक आहार के रूप में बिना किसी डर के खाया जा सकता है।
भारत में अंडा लंबे समय से भोजन का हिस्सा रहा है, विशेषकर उन समुदायों में जो मांसाहारी या अर्ध-शाकाहारी भोजन करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अंडा सस्ता, सुलभ और पोषण से भरपूर भोजन माना जाता है। स्कूलों में मिड-डे मील योजना में अंडा। गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए पोषण कार्यक्रम। खेल और फिटनेस से जुड़े लोगों के लिए प्रोटीन स्रोत। यह सभी उदाहरण बताता है कि अंडा केवल भोजन नहीं, बल्कि पोषण सुरक्षा का आधार है।
एक सामान्य मुर्गी के अंडे में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन, विटामिन A, D, E और B12, आयरन, जिंक और सेलेनियम, कोलीन (दिमागी विकास के लिए आवश्यक) होता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और FAO दोनों ही अंडे को “Complete Food” मानता है।
नाइट्रोफ्यूरान एक प्रकार का एंटीबायोटिक समूह है, जिसका उपयोग पहले पशुपालन में संक्रमण रोकने के लिए किया जाता था। वैज्ञानिक शोधों के बाद यह पाया गया कि इसका लंबे समय तक सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। इसी कारण से भारत, यूरोपीय संघ और अमेरिका सहित कई देशों में इसका उपयोग वर्षों पहले प्रतिबंधित कर दिया गया है।
कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और व्हाट्सएप फॉरवर्ड्स में यह दावा किया गया कि अंडों में नाइट्रोफ्यूरान पाया जा रहा है। इससे कैंसर का खतरा बढ़ता है और बच्चों को अंडा नहीं देना चाहिए। इन दावों के साथ कोई वैज्ञानिक अध्ययन, आधिकारिक रिपोर्ट या प्रयोगशाला प्रमाण नहीं जोड़ा गया है।
FSSAI ने बयान जारी कर कहा है कि “भारत में मुर्गी पालन में नाइट्रोफ्यूरान का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। अंडों को कैंसर से जोड़ने वाले दावे वैज्ञानिक रूप से निराधार और भ्रामक हैं।”
FSSAI द्वारा नियमित रूप से सैंपल कलेक्शन। अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं में जांच। राज्य खाद्य सुरक्षा विभागों के माध्यम से निगरानी की जाती है। यदि किसी उत्पाद में प्रतिबंधित पदार्थ पाया जाता है तो तुरंत बाजार से हटाया जाता है और निर्माता पर कड़ी कार्रवाई होती है।
अब तक किए गए अंतरराष्ट्रीय शोधों में अंडा के सेवन और कैंसर के बीच सीधा कारणात्मक संबंध नहीं पाया गया है । संतुलित मात्रा में अंडा खाने को सुरक्षित बताया गया है। जब बिना प्रमाण के भोजन को कैंसर से जोड़ा जाता है, तो लोगों में डर फैलता है, पोषण की कमी हो सकती है, गरीब और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। भारत आज भी बच्चों में स्टंटिंग, महिलाओं में एनीमिया और प्रोटीन की कमी, जैसी समस्याओं से जूझ रहा है।
अफवाहों के कारण अंडों की बिक्री में गिरावट, पोल्ट्री किसानों को नुकसान और रोजगार पर असर पड़ता है। क्योंकि पोल्ट्री उद्योग भारत में करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ा है। किसान संगठनों ने कहा है कि बिना तथ्य के खबरें, मेहनतकश किसानों को नुकसान पहुंचाती हैं। अफवाहों से बचने के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करना चाहिए। ऐसे भी अंडे को अच्छी तरह से पकाकर खाना चाहिए। फ्रिज में सही तापमान पर रखना चाहिए। टूटे या बदबूदार अंडे नही खाना चाहिए।
मीडिया का दायित्व है कि स्वास्थ्य से जुड़ी खबरों में तथ्य की जांच करें। रिपोर्ट में विशेषज्ञों की राय शामिल करे और डर फैलाने वाली सुर्खियों से बचे। आज जरूरत है कि लोग सूचना को परखना सीखें और “वायरल” होने को “सच” नही मानें।
सूत्रों के अनुसार, अंडों को कैंसर से जोड़ने वाले दावे न तो वैज्ञानिक हैं और न ही तथ्यात्मक। FSSAI और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य संस्थानों ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत में उपलब्ध अंडे पूरी तरह सुरक्षित और पौष्टिक हैं।
