दुनिया का सबसे दुर्लभ और महंगा फूल है - “स्लीपर ऑर्किड”

Jitendra Kumar Sinha
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“स्लीपर ऑर्किड”, जिसे रोथ्सचाइल्ड स्लीपर ऑर्किड या आम भाषा में जूता ऑर्किड कहा जाता है, ऑर्किड की दुनिया का सबसे दुर्लभ और महंगा फूल माना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Paphiopedilum rothschildianum है। यह फूल अपनी अनोखी बनावट, दीर्घायु सुंदरता और सीमित भौगोलिक उपस्थिति के कारण पूरी दुनिया में चर्चित है। इसकी कीमत कई बार लाखों रुपये तक पहुंच जाती है, इसलिए इसे “सोने जैसा अनमोल फूल” भी कहा जाता है।


रोथ्सचाइल्ड स्लीपर ऑर्किड केवल मलेशिया के बोर्नियो द्वीप स्थित माउंट किनाबालु क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। यह पर्वतीय वर्षावन क्षेत्र समुद्र तल से लगभग 500 से 1200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां की आर्द्र जलवायु, हल्की धूप और चूना-पत्थर वाली मिट्टी इस फूल के लिए आदर्श मानी जाती है। इसकी सीमित उपलब्धता ही इसे और अधिक दुर्लभ बनाती है।


इस ऑर्किड का सबसे आकर्षक पहलू इसका जूते जैसा आकार है। फूल का निचला भाग थैली या जूते की तरह दिखता है, जिसमें परागण करने वाले कीट फंस जाता है और इस तरह परागण की प्रक्रिया पूरी होती है। इसके लंबे, धारीदार पंखुड़ियां और आकर्षक रंग इसे अन्य ऑर्किड से बिल्कुल अलग पहचान देता है। एक खास बात यह भी है कि इसका फूल करीब दो साल तक अपनी सुंदरता बनाए रख सकता है, जो फूलों की दुनिया में बेहद दुर्लभ है।


स्लीपर ऑर्किड का मूल्य इसके दुर्लभ होने, धीमी वृद्धि और कठिन संवर्धन प्रक्रिया के कारण अत्यधिक है। एक पौधे को फूल देने में 10 से 15 साल तक का समय लग सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी अवैध तस्करी भी होती रही है, जिस कारण इसे संरक्षित प्रजातियों की सूची में रखा गया है।


रोथ्सचाइल्ड स्लीपर ऑर्किड को CITES (Convention on International Trade in Endangered Species) के तहत संरक्षित किया गया है। बिना अनुमति इसके व्यापार और निर्यात पर प्रतिबंध है। माउंट किनाबालु नेशनल पार्क में स्थानीय प्रशासन और वैज्ञानिक मिलकर इसके संरक्षण के लिए विशेष प्रयास कर रहे हैं।


यह फूल न केवल वनस्पति विज्ञानियों के लिए अध्ययन का विषय है, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है। यह जैव विविधता के महत्व और प्राकृतिक धरोहरों के संरक्षण की आवश्यकता की याद दिलाता है।


स्लीपर ऑर्किड प्रकृति की एक अनमोल धरोहर है, जो अपनी दुर्लभता, अनोखी बनावट और लंबी आयु के कारण विश्व में विशिष्ट स्थान रखता है। इसका संरक्षण न केवल मलेशिया बल्कि पूरी मानवता की जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस अद्भुत फूल की सुंदरता को देख सकें।



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