गयाजी में सोमवार को सहकारिता सह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय पहल की घोषणा की। उन्होंने बताया कि डोभी–गया–पटना मुख्य पथ को “ग्रीन कॉरिडोर” के रूप में विकसित किया जाएगा। यह परियोजना राज्य में हरित विकास, पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता को बढ़ावा देने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। मंत्री ने इस योजना को समयबद्ध ढंग से लागू करने पर जोर दिया।
डोभी से पटना तक फैला यह मुख्य पथ लगभग 130 किलोमीटर लंबा होगा, जिसे पूरी तरह “ग्रीन कॉरिडोर” के रूप में विकसित किया जाएगा। सड़क के दोनों ओर बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा, जिससे यह मार्ग न केवल यातायात का साधन रहेगा बल्कि हरियाली से भरपूर पर्यावरणीय क्षेत्र के रूप में भी विकसित होगा। इससे सड़क के किनारे का प्राकृतिक सौंदर्य बढ़ेगा और यात्रियों को भी स्वच्छ व शीतल वातावरण मिलेगा।
मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि जून–जुलाई माह से पौधारोपण अभियान शुरू किया जाए। मानसून के मौसम को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है ताकि पौधों के जीवित रहने की संभावना अधिक हो। स्थानीय जलवायु और मिट्टी के अनुसार, छायादार, फलदार और औषधीय पौधों का चयन किया जाएगा, जिससे दीर्घकालीन लाभ मिल सके।
“ग्रीन कॉरिडोर” परियोजना राज्य में बढ़ते प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में सहायक होगी। सड़क के किनारे लगाए जाने वाले पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वायु को शुद्ध करेगा। इसके साथ ही तापमान में संतुलन बनाए रखने, ध्वनि प्रदूषण को कम करने और मिट्टी के कटाव को रोकने में भी यह परियोजना मददगार साबित होगा।
इस हरित गलियारे के विकास से पक्षियों, तितलियों और अन्य छोटे जीव-जंतुओं के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध होगा। इससे क्षेत्र की जैव विविधता को मजबूती मिलेगी। वन विभाग और पर्यावरण विभाग मिलकर इस बात का ध्यान रखेंगे कि पौधारोपण के साथ-साथ उसके संरक्षण और रखरखाव की भी समुचित व्यवस्था हो।
“ग्रीन कॉरिडोर” बनने से स्थानीय लोगों को भी अनेक लाभ मिलेगा। हरियाली बढ़ने से क्षेत्र का पर्यावरण सुधरेगा, जिससे स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। साथ ही, सड़क के सौंदर्यीकरण से पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
डोभी–गया–पटना पथ को “ग्रीन कॉरिडोर” के रूप में विकसित करने की यह योजना बिहार में सतत विकास की दिशा में एक सराहनीय पहल है। यह न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ, सुरक्षित और हरित भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।
