दक्षिण चीन के युन्नान प्रांत का लीजियांग शहर अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक विरासत और हिमालयी पृष्ठभूमि के लिए जाना जाता है। लेकिन हाल ही में यह इलाका एक अलग ही वजह से चर्चा में रहा, जब बाइशा कस्बे के ऊपर रात के आकाश में जेमिनिड उल्का वर्षा ने अद्भुत नजारा पेश किया। तारों से सजा गहरा नीले आकाश में चमकती और लकीरे खींचती उल्काओं ने मानो आसमान को जीवंत कर दिया।
“जेमिनिड उल्का” वर्षा को खगोल विज्ञान की दुनिया में वर्ष की सबसे शानदार और भरोसेमंद उल्का वर्षाओं में गिना जाता है। यह हर साल दिसंबर के मध्य में दिखाई देती है और साफ मौसम होने पर प्रति घंटे 30 से 60 तक उल्काएं देखा जा सकता है। यह उल्काएं दरअसल छोटे-छोटे पथरीले कण होते हैं, जो पृथ्वी के वायुमंडल में तेजी से प्रवेश करता है और घर्षण के कारण जलकर क्षणभर में प्रकाश की चमकदार रेखा बनाते हुए विलीन हो जाता है।
बाइशा कस्बा में उस रात का वातावरण इस खगोलीय घटना के लिए लगभग आदर्श था। ठंडी सर्द रात, प्रदूषण से मुक्त साफ आसमान और आसपास फैली हिमालयी पर्वतमालाओं की शांत पृष्ठभूमि ने इस दृश्य को और भी मनोहारी बना दिया। ऐसा लग रहा था जैसे प्रकृति और ब्रह्मांड मिलकर कोई भव्य मंच तैयार कर रहा हो, जहां सितारा स्वयं कलाकार बन गया हो।
स्थानीय निवासियों के लिए यह नजारा किसी उत्सव से कम नहीं था। कई लोग देर रात तक खुले मैदानों और घरों की छतों पर जमे रहे, तो वहीं खगोल प्रेमी और फोटोग्राफर अपने कैमरों के साथ इस दुर्लभ पल को कैद करने में जुटे रहे। हर चमकती उल्का के साथ उत्साह और आश्चर्य की हल्की-सी आवाजें सुनाई देती रही। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी की निगाहें एक ही दिशा में टिकी थी, आसमान की ओर।
“जेमिनिड उल्का” वर्षा का महत्व केवल इसके दृश्य सौंदर्य तक सीमित नहीं है। यह ब्रह्मांड की विशालता और उसमें छोटी-सी मौजूदगी का एहसास कराती है। भागदौड़ भरी आधुनिक जिन्दगी में ऐसे पल इंसान को ठहरकर सोचने पर मजबूर कर देता है कि जिस पृथ्वी पर रहते हैं, वह भी एक अनंत और रहस्यमय ब्रह्मांड का छोटा-सा हिस्सा है।
लीजियांग के बाइशा कस्बे में दिखा यह दृश्य एक यादगार अनुभव बन गया, जिसे वहां मौजूद लोग लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे। जेमिनिड उल्काओं की चमक ने न केवल आसमान को रोशन किया, बल्कि लोगों के मन में भी विस्मय, जिज्ञासा और प्रकृति के प्रति सम्मान की एक नई रोशनी जगा दी।
