जापान के शिजुओका प्रांत के इतो शहर में स्थित “माउंट ओमुरो” (Omuroyama) प्रकृति की एक ऐसी अद्भुत रचना है, जिसे देखकर पहली नजर में कोई भी चौंक जाता है। लगभग 580 मीटर ऊंचा यह पर्वत एक विलुप्त सिंडर कोन ज्वालामुखी है, जिसकी गोलाई और ऊपर बना गड्ढा इसे बिल्कुल पुडिंग कप जैसा रूप देता है। यही विशिष्ट आकार इसे जापान के सबसे पहचानने योग्य प्राकृतिक स्थलों में शामिल करता है।
वैज्ञानिकों के अनुसार “माउंट ओमुरो” का निर्माण लगभग 4000 साल पहले हुए ज्वालामुखीय विस्फोटों से हुआ था। विस्फोट के दौरान निकले लावा और राख ने शंक्वाकार ढांचा बनाया, जबकि शीर्ष पर बना गोल गड्ढा (क्रेटर) आज भी पूरी तरह स्पष्ट दिखाई देता है। खास बात यह है कि इसके आसपास की ढलानें इतनी समान और संतुलित हैं कि यह मानो किसी कारीगर द्वारा तराशा गया हो।
माउंट ओमुरो की खूबसूरती हर मौसम में अलग रूप में नजर आता है। वसंत और गर्मियों में यह हरे-भरे घास के कालीन से ढका रहता है। शरद ऋतु में घास का रंग सुनहरा-भूरा हो जाता है, जो पहाड़ को एक नया आकर्षण देता है। सर्दियों में कभी-कभी बर्फ की हल्की परत इसे और भी मनमोहक बना देता है। इसी कारण से यह पर्वत फोटोग्राफरों और प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग समान माना जाता है।
पर्यटकों के लिए “माउंट ओमुरो” तक पहुंचना बेहद आसान है। यहां एक आधुनिक रोपवे (केबल कार) सुविधा उपलब्ध है, जो कुछ ही मिनटों में शिखर तक पहुंचा देता है। ऊपर पहुंचकर पर्यटक लगभग 1 किलोमीटर लंबा “क्रेटर रिम वॉक” कर सकता है। इस गोलाकार पैदल मार्ग से चारों ओर फैला प्रशांत महासागर, इतो शहर और आसपास के पर्वतों का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
“माउंट ओमुरो” न सिर्फ एक प्राकृतिक स्थल है, बल्कि इसका सांस्कृतिक महत्व भी है। पारंपरिक रूप से यहां हर साल यामायाकी (Yamayaki) नामक उत्सव होता है, जिसमें घास को नियंत्रित रूप से जलाया जाता है। इससे न सिर्फ पारिस्थितिकी संतुलन बना रहता है, बल्कि यह उत्सव पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनता है।
आज “माउंट ओमुरो” जापान के सबसे प्रसिद्ध दर्शनीय स्थलों में गिना जाता है। इसकी अनोखी बनावट, शांत वातावरण और आसान पहुंच इसे परिवार, शोधकर्ताओं और अंतरराष्ट्रीय सैलानियों, सभी के लिए खास बनाता है।
