बिहार लंबे समय तक अपनी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और शैक्षणिक परंपराओं के लिए जाना जाता रहा है। नालंदा और विक्रमशिला जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों से लेकर आधुनिक शैक्षणिक संस्थानों तक, यह भूमि ज्ञान की परंपरा का साक्षी रहा है। अब उसी परंपरा को आधुनिक विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जोड़ने का एक बड़ा प्रयास है “डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी”।
राजेन्द्र नगर, पटना स्थित यह साइंस सिटी अब आम दर्शकों के लिए खोल दिया गया है। यह केवल एक पर्यटन स्थल नहीं है, बल्कि एक जीवंत शिक्षण प्रयोगशाला है, जहां विज्ञान को देखा, समझा और महसूस किया जा सकता है।
डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी का उद्घाटन 21 सितंबर को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा किया गया था। हालांकि उद्घाटन के बाद भी यह कुछ समय तक आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं थी। लेकिन अब “राष्ट्रीय गणित दिवस” के अवसर पर आयोजित समारोह में शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने इसके “ई-टिकटिंग पोर्टल” का शुभारंभ किया है, जिससे यह साइंस सिटी औपचारिक रूप से दर्शकों के लिए खोल दिया गया है।
साइंस सिटी का नाम भारत के महान वैज्ञानिक, मिसाइल मैन और पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर रखा गया है। डॉ कलाम का जीवन स्वयं विज्ञान, शिक्षा और युवाओं के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा है। उन्होंने हमेशा कहा है कि “विज्ञान मानवता की सेवा के लिए होना चाहिए।” साइंस सिटी की पूरी अवधारणा भी इसी विचारधारा पर आधारित है, विज्ञान को आम लोगों तक, खासकर बच्चों और युवाओं के करीब लाना है।
राजेन्द्र नगर, पटना शहर के प्रमुख इलाकों से अच्छी कनेक्टिविटी, विशाल और हरित परिसर, आधुनिक वास्तुकला, दिव्यांग-अनुकूल ढांचा, डिजिटल गाइडेंस और सूचना पटल, दर्शकों के लिए सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक, हर घंटे अधिकतम 50 दर्शकों को प्रवेश, भीड़ नियंत्रण और बेहतर अनुभव के लिए स्लॉट आधारित एंट्री, की व्यवस्था की गई है।
साइंस सिटी के लिए ई-टिकटिंग सिस्टम को अपनाया गया है। इसके लिए भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के पोर्टल को अधिकृत किया गया है। बिहार सरकार ने इसे अधिकतम समावेशी बनाने के लिए बेहद किफायती शुल्क तय किया है। 12 वर्ष से अधिक उम्र वालों के लिए ₹50 और 5 से 12 वर्ष तक के लिए ₹10 तथा छात्रों के समूह (25 या उससे अधिक), किसी भी संस्था के माध्यम से आने वाले समूह, दिव्यांगजन और 70 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्ग के लिए निःशुल्क प्रवेश की व्यवस्था की गई है। समूहों के लिए पहले से अप्वाइंटमेंट लेना अनिवार्य है।
डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी की आत्मा इसकी विविध गैलरियां हैं। यह गैलरियां केवल देखने के लिए नहीं है, बल्कि अनुभव करने के लिए बनाई गई हैं। विज्ञान और मानव जीवन गैलरी- दैनिक जीवन में विज्ञान की भूमिका, स्वास्थ्य, ऊर्जा, पर्यावरण और तकनीक, सरल प्रयोगों के माध्यम से जटिल अवधारणाओं की व्याख्या। अंतरिक्ष और खगोल विज्ञान गैलरी- सौरमंडल का मॉडल, उपग्रह और रॉकेट तकनीक, इसरो के प्रमुख मिशनों की जानकारी, चंद्रयान और मंगलयान की झलक। गणित और तर्क गैलरी- राष्ट्रीय गणित दिवस की भावना से प्रेरित, रामानुजन और भारतीय गणितज्ञों का योगदान, गणितीय पहेलियां और इंटरैक्टिव खेल। जैव-विज्ञान और मानव शरीर गैलरी- मानव शरीर की संरचना, डीएनए, कोशिका और जैव-प्रक्रियाएं और स्वास्थ्य जागरूकता पर केंद्रित प्रदर्शन। भौतिकी और रसायन गैलरी- बल, ऊर्जा और गति, प्रकाश, ध्वनि और विद्युत, रसायन विज्ञान के सुरक्षित प्रयोग।
यह साइंस सिटी विशेष रूप से छात्रों के लिए एक वरदान है। पाठ्यक्रम से जुड़ी अवधारणाओं की व्यावहारिक समझ, STEM (Science, Technology, Engineering, Mathematics) शिक्षा को बढ़ावा, वैज्ञानिक सोच और जिज्ञासा का विकास, विज्ञान की बुनियादी समझ मजबूत करना, प्रयोगात्मक और तार्किक दृष्टिकोण का विकास।
बिहार सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि साइंस सिटी सभी के लिए सुलभ हो। व्हीलचेयर रैंप, ब्रेल सूचना, बैठने और विश्राम की पर्याप्त व्यवस्था तथा निःशुल्क प्रवेश सुविधा। यह पहल सामाजिक न्याय और समान अवसर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
साइंस सिटी केवल शिक्षा का केंद्र नहीं है, बल्कि रोजगार सृजन का माध्यम भी है। प्रत्यक्ष रोजगार में गाइड, तकनीकी स्टाफ, सुरक्षा और प्रबंधन कर्मी। अप्रत्यक्ष रोजगार में पर्यटन, होटल और परिवहन, स्थानीय व्यवसाय।
डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी बिहार को वैज्ञानिक पर्यटन के मानचित्र पर स्थापित कर सकता है। संभावनाएं है कि स्कूल और कॉलेज टूर, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक भ्रमण, विज्ञान मेला और कार्यशालाएं आयोजित हो सकता है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भविष्य में यहां कई नई सुविधाएं जोड़ी जाएंगी जिसमें 3D थिएटर, रोबोटिक्स और एआई लैब, विज्ञान कार्यशालाएं, वैज्ञानिक व्याख्यान श्रृंखला शामिल हैं।
यह साइंस सिटी तभी सफल होगी जब समाज इसे अपनाएगा। इसके लिए स्कूलों को नियमित भ्रमण आयोजित करना चाहिए। अभिभावकों को बच्चों को प्रेरित करना चाहिए और शिक्षकों को इसे शिक्षण का हिस्सा बनाना चाहिए।
डॉ एपीजे अब्दुल कलाम साइंस सिटी केवल एक भवन या प्रदर्शनी स्थल नहीं है। यह एक विचार है कि विज्ञान सबके लिए है, कि ज्ञान लोकतांत्रिक होना चाहिए, और कि भविष्य का निर्माण जिज्ञासु दिमागों से होता है। बिहार जैसे राज्य में इस तरह की पहल यह संदेश देता है कि शिक्षा और विज्ञान को लेकर सरकार गंभीर है। यदि यह परियोजना अपनी पूरी क्षमता से विकसित होता है, तो आने वाले वर्षों में यह न केवल बिहार बल्कि पूरे पूर्वी भारत के लिए विज्ञान शिक्षा का केंद्र बन सकता है।
