स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत - जेपी गंगा पथ किनारे दुकानों का - होगा नये साल में आवंटन

Jitendra Kumar Sinha
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राजधानी पटना के महत्वाकांक्षी जेपी गंगा पथ परियोजना के अंतर्गत बनाए जा रहे दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया अब नए साल में पूरी की जाएगी। पहले यह प्रक्रिया दिसंबर महीने में शुरू होने वाली थी, लेकिन तकनीकी और व्यवस्थागत कारणों से इसमें कुछ देरी हो रही है। अब पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने संकेत दिया हैं कि नए वर्ष की शुरुआत में दुकानों के आवंटन की प्रक्रिया को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।


जेपी गंगा पथ के किनारे कुल लगभग 500 दुकानों का निर्माण प्रस्तावित है, जिनमें से अब तक करीब 250 दुकानों को स्थापित किया जा चुका है। इन दुकानों का निर्माण प्री-फेब्रिकेटेड ढांचे के रूप में किया गया है, ताकि कम समय में बेहतर गुणवत्ता के साथ इन्हें तैयार किया जा सके। वर्तमान में इन दुकानों में रंग-रोगन और फिनिशिंग का काम तेजी से चल रहा है, जिससे इसे जल्द से जल्द उपयोग के लिए तैयार किया जा सके।


पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारियों के अनुसार, कुछ प्री-फेब्रिकेटेड दुकानें परिवहन और स्थापना के दौरान क्षतिग्रस्त हो गई थी। हालांकि, उन दुकानों की मरम्मत और दुरुस्ती का काम भी साथ-साथ किया जा रहा है। संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि गुणवत्ता से कोई समझौता न हो और सभी दुकानें मानक के अनुरूप तैयार हो।


जेपी गंगा पथ के किनारे इन दुकानों के खुलने से न केवल स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह इलाका एक नए व्यावसायिक और पर्यटन केंद्र के रूप में भी विकसित होगा। गंगा नदी के किनारे बने इस पथ पर पहले से ही लोगों की आवाजाही बढ़ी है, खासकर सुबह और शाम के समय। दुकानों के खुलने से यहां खान-पान, हस्तशिल्प, दैनिक जरूरतों और स्थानीय उत्पादों से जुड़ा कारोबार विकसित होने की संभावना है।


शहरवासियों का मानना है कि इन दुकानों के चालू होने से युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और छोटे व्यापारियों को एक बेहतर मंच उपलब्ध होगा। साथ ही, गंगा पथ पर आने वाले पर्यटकों को भी सुविधाएं मिलेगी, जिससे पटना की छवि एक आधुनिक और सुव्यवस्थित शहर के रूप में उभरेगी।


पटना स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत जेपी गंगा पथ को शहर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल किया गया है। दुकानों के आवंटन के बाद यहां व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ेगी और राजस्व में भी इजाफा होगा। प्रशासन का लक्ष्य है कि नए साल में इस परियोजना का लाभ आम लोगों तक पहुंचे और पटना के विकास को नई दिशा मिले।



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