प्यार, पजेशन और जिंदा रहने की जद्दोजहद की कहानी है - फिल्म “द गर्लफ्रेंड”

Jitendra Kumar Sinha
0

 


रिश्ता तब खूबसूरत लगता है, जब उसमें भरोसा, सम्मान और आजादी हो। लेकिन जब प्रेम ही पजेशन में बदल जाए, जब परवाह ही कंट्रोल बनने लगे, तो रिश्ता बोझ बन जाता है। तेलुगु रोमांटिक ड्रामा फिल्म “द गर्लफ्रेंड” इसी कड़वी हकीकत को बेहद संवेदनशील अंदाज में पर्दे पर उतारती है।

फिल्म की कहानी घूमती है इंग्लिश लिटरेचर की पोस्टग्रेजुएट छात्रा भूमा देवी के इर्द-गिर्द। एक ऐसी लड़की जो अपने दिल की सुनकर फैसला लेती है, सपनों को अपनी प्राथमिकता मानती है और जीवन की चुनौतियों का सामना पूरी मजबूती से करती है। लेकिन उसकी यही आजादी और आत्मविश्वास किसी और को रास नहीं आता, और यही बात कहानी की दिशा बदल देती है।

भूमा देवी की जिन्दगी में प्यार दस्तक देता है। कसमें, वादे, साथ रहने का सपना और एक खूबसूरत भविष्य की उम्मीद। मगर धीरे-धीरे यह रिश्ता बदलने लगता है। प्यार के नाम पर उस पर सवाल उठने लगता है, उसके फैसलों पर रोक लगाई जाती है और उसके जीवन के हर कदम पर निगरानी बढ़ती जाती है।

फिल्म बेहद बारीकी से दिखाता है कि एक टॉक्सिक रिलेशनशिप कैसे शुरू होता है। धीमे-धीमे, प्यार की परतों में लिपटा हुआ, लेकिन अंत में आत्म-सम्मान को तोड़ता हुआ। भूमा देवी इस रिश्ते में फंसती जाती है, और फिर शुरू होता है उसका संघर्ष। खुद को, अपनी पहचान और अपनी आजादी को बचाने का।

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है इसका अभिनय। रश्मिका मंदाना ने भूमा देवी का किरदार इतनी ईमानदारी से निभाया है कि दर्शक उसके दर्द, डर और संघर्ष से खुद को जोड़ लेते हैं। दीक्षित शेट्टी अपने जटिल, नियंत्रक प्रेमी के किरदार में पूरी तरह डूबे नजर आते हैं। अनु इमैनुएल, राव रमेश और कौशिक महाता कहानी को मजबूती देने वाले किरदारों में प्रभाव छोड़ते हैं। हर दृश्य में कलाकारों की भावनाएं और संवाद रिश्तों की सच्चाई का आइना बनकर सामने आता है।

निर्देशक राहुल रविंद्रन ने फिल्म को बेहद संवेदनशील ढंग से पेश किया है। उन्होंने दिखाया है कि टॉक्सिक रिलेशनशिप सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक कैद भी होता है। कहानी में रोमांस है, भावनाएं हैं, टूटन है और अंत में एक बहुत बड़ा संदेश है, प्यार कभी आपको कैद नहीं करता, बल्कि मजबूत बनाता है।

यह सिर्फ रोमांस नहीं है, एक रियल लाइफ इमोशनल जर्नी है। क्योंकि यह दिखाती है कि रिश्ते में “कंट्रोल” और “केयर” के बीच कितनी पतली रेखा होती है और सबसे जरूरी। क्योंकि यह उन सभी लोगों को हिम्मत देती है जो कभी ऐसे रिश्तों में फंसे हो।

“द गर्लफ्रेंड” एक ऐसी फिल्म है जो दिल को छूती है, सोचने पर मजबूर करती है और यह सिखाती है कि खुद से प्यार करना भी एक जिम्मेदारी है। यह फिल्म हर उस इंसान के लिए जरूरी है, जो रिश्तों में भावनाओं की सच्चाई समझना चाहता है।



एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top