बिहार के एससी-एसटी छात्रों के लिए विदेश में पढ़ाई करने का सपना होगा साकार - “ओवरसीज छात्रवृत्ति योजना”

Jitendra Kumar Sinha
0

 


 

शिक्षा किसी भी समाज के विकास की सबसे मजबूत नींव होती है। खासकर वंचित और पिछड़े वर्गों के लिए यह सामाजिक बराबरी का सबसे प्रभावी माध्यम है। इसी दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए बिहार सरकार ने अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) के छात्रों के लिए विदेश में उच्च शिक्षा का रास्ता और आसान कर दिया है। अब “ओवरसीज स्कीम” के तहत विदेश जाने वाले बिहार के एससी-एसटी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।


यह फैसला बिहार के हजारों होनहार छात्रों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर आया है, जो संसाधनों के अभाव में अपने सपनों को पूरा नहीं कर पाते थे।


मंगलवार को बिहार के अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र पासवान ने नई दिल्ली में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार तथा केंद्र सरकार के विभागीय सचिव से मुलाकात की। इस बैठक में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर चर्चा हुई।


इसी दौरान मंत्री लखेंद्र पासवान ने एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा है, विदेश में पढ़ाई के लिए जाने वाले बिहार के एससी-एसटी छात्र-छात्राओं को केंद्र की ओवरसीज स्कीम के तहत छात्रवृत्ति दी जाए। इस प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने सहमति व्यक्त की और इसे लागू करने का भरोसा दिया है।


यह सहमति न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक न्याय की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


ओवरसीज स्कॉलरशिप योजना का उद्देश्य यह है कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली छात्र विदेश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटीज में उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें। इस योजना के अंतर्गत चयनित छात्रों को ट्यूशन फीस, रहने-खाने का खर्च, यात्रा व्यय और अन्य शैक्षणिक खर्चों में सहायता, प्रदान की जाती है। अब बिहार के एससी-एसटी वर्ग के छात्र भी इस सुविधा का लाभ व्यापक स्तर पर उठा सकेंगे।


इस निर्णय से बिहार के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में रहने वाले छात्रों को वैश्विक स्तर की शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। उन्हें अंतरराष्ट्रीय अनुभव मिलेगा। बिहार और देश के लिए कुशल मानव संसाधन तैयार होगा। समाज में समानता और समावेशन को बल मिलेगा। यह पहल केवल छात्रवृत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक ढांचे को बदलने की क्षमता रखती है।


मंत्री लखेंद्र पासवान की यह पहल बताता है कि सरकार वंचित वर्गों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए गंभीर प्रयास कर रही है। शिक्षा के माध्यम से ही सामाजिक असमानता को कम किया जा सकता है, और यह योजना उसी लक्ष्य को मजबूती देती है।


यह फैसला आने वाले वर्षों में बिहार के एससी-एसटी युवाओं के जीवन की दिशा बदल सकता है। विदेश में पढ़कर लौटे ये छात्र न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बनेंगे।


यह योजना बिहार के लिए गर्व का विषय है और उन सपनों को पंख देने वाली है, जो अब तक संसाधनों की कमी के कारण अधूरे रह जाते थे।



एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top