एसबीआइ ने बढ़ाई एटीएम निकासी फीस

Jitendra Kumar Sinha
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देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआइ) ने एटीएम से नकद निकासी और नॉन-फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर लगने वाले शुल्क में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है। अब दूसरे बैंकों के एटीएम से पैसे निकालने पर ग्राहकों को प्रति लेनदेन 23 रुपये + जीएसटी चुकाने होंगे, जबकि पहले यह शुल्क 21 रुपये + जीएसटी था। इसी तरह बैलेंस चेक, मिनी स्टेटमेंट जैसी नॉन-फाइनेंशियल सेवाओं पर शुल्क बढ़ाकर 11 रुपये + जीएसटी कर दिया गया है।


यह नई दरें मुफ्त लेनदेन की सीमा समाप्त होने के बाद लागू होगी। एसबीआइ अपने ग्राहकों को हर महीने 10 मुफ्त एटीएम ट्रांजैक्शन की सुविधा देता है, जिसके बाद किए गए लेनदेन पर यह शुल्क लिया जाएगा।


बैंकिंग विशेषज्ञों के अनुसार, एटीएम नेटवर्क को बनाए रखने, मशीनों की सुरक्षा, कैश मैनेजमेंट और तकनीकी रखरखाव की लागत लगातार बढ़ रही है। इसी कारण से बैंक समय-समय पर शुल्क में संशोधन करती है।


एसबीआइ ने इससे पहले फरवरी 2025 में एटीएम निकासी शुल्क को 21 रुपये किया था और अब एक बार फिर इसमें बढ़ोतरी की गई है।


बैंकों का तर्क है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और नकदी पर निर्भरता कम करने के लिए यह कदम जरूरी है। हालांकि, ग्रामीण और छोटे शहरों में रहने वाले लाखों लोग आज भी नकदी पर निर्भर हैं, जिनके लिए यह बदलाव बोझ बन सकता है।


इस फैसले का सीधा असर उन ग्राहकों पर पड़ेगा जो अक्सर दूसरे बैंकों के एटीएम का उपयोग करते हैं या महीने में 10 से अधिक बार एटीएम ट्रांजैक्शन करते हैं। खासकर वेतनभोगी कर्मचारी, पेंशनधारी और छोटे व्यापारियों को हर अतिरिक्त निकासी पर अधिक शुल्क देना होगा।


उदाहरण के तौर पर, यदि कोई ग्राहक महीने में 14 बार एटीएम से पैसे निकालता है, तो चार अतिरिक्त लेनदेन पर अब पहले से ज्यादा रकम कटेगी। पहले जहां इन चार ट्रांजैक्शन पर 84 रुपये + जीएसटी लगते थे, अब वही खर्च बढ़कर 92 रुपये + जीएसटी हो जाएगा।


इस निर्णय से यूपीआई, मोबाइल बैंकिंग और कार्ड आधारित भुगतान को और बढ़ावा मिल सकता है। सरकार और बैंक लंबे समय से कैशलेस इकोनॉमी की दिशा में काम कर रहा है। बढ़ते एटीएम शुल्क लोगों को डिजिटल विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर सकता है।


यह भी सच है कि देश के कई हिस्सों में आज भी इंटरनेट और डिजिटल साक्षरता की कमी है। ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए नकद निकासी ही मुख्य साधन है, इसलिए उन पर इसका प्रभाव अधिक पड़ेगा।


एसबीआइ द्वारा एटीएम शुल्क में की गई यह बढ़ोतरी बैंकिंग लागत और डिजिटल परिवर्तन की दिशा में उठाया गया कदम है। लेकिन इसके साथ ही यह आम ग्राहकों की जेब पर अतिरिक्त भार भी डालेगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बदलाव वास्तव में डिजिटल लेनदेन को तेज करेगा या फिर ग्राहकों में असंतोष बढ़ाएगा।



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