बिहार के जिला खनन कार्यालयों में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे डाटा इंट्री ऑपरेटरों के तबादले की प्रक्रिया जल्द शुरू होने जा रही है। खान एवं भूतत्व विभाग ने इस दिशा में तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने सभी जिलों से उन डाटा इंट्री ऑपरेटरों की सूची मांगी है, जो तीन वर्ष, पांच वर्ष अथवा उससे अधिक समय से एक ही कार्यालय में पदस्थापित हैं। सूची तैयार होते ही ऐसे सभी कर्मचारियों का तत्काल तबादला किया जाएगा।
इस निर्णय को विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक सुधार के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य कार्यालयों में पारदर्शिता बढ़ाना और अनियमितताओं पर अंकुश लगाना है।
विभाग को लंबे समय से यह शिकायतें मिल रही थी कि कुछ कार्यालयों में मनमानी, पक्षपात और अनियमितताओं को बढ़ावा मिल रहा है। कई स्थानों पर यह आरोप लगा है कि एक ही जगह लंबे समय से जमे कर्मचारी स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली हो गए हैं, जिससे कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।
इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए खान एवं भूतत्व विभाग ने यह निर्णय लिया है कि अब किसी भी डाटा इंट्री ऑपरेटर को वर्षों तक एक ही कार्यालय में नहीं रखा जाएगा। विभाग का मानना है कि नियमित तबादला व्यवस्था से न केवल कार्यों में पारदर्शिता आएगी, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होगी।
विभाग ने यह भी तय किया है कि भविष्य में तबादले मनमाने तरीके से नहीं होंगे, बल्कि इसके लिए एक स्पष्ट और स्थायी मापदंड तैयार किया जाएगा। इस मापदंड के आधार पर मार्च 2026 से डाटा इंट्री ऑपरेटरों के तबादले नियमित रूप से किए जाएंगे।
इस व्यवस्था के अंतर्गत यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी कर्मचारी तय समय सीमा से अधिक एक ही स्थान पर न रहे। इससे सभी जिलों में समान कार्य संस्कृति विकसित होगी और किसी एक कार्यालय में “स्थायी कब्जे” जैसी स्थिति नहीं बनेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि खनन जैसे संवेदनशील विभाग में डाटा इंट्री ऑपरेटरों की भूमिका बेहद अहम होती है। खनन पट्टों, रॉयल्टी, परिवहन और राजस्व से जुड़ा पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में इन्हीं कर्मचारियों के माध्यम से संचालित होता है। ऐसे में यदि कोई कर्मचारी लंबे समय तक एक ही जगह तैनात रहता है, तो उस पर अनावश्यक प्रभाव और दबाव दोनों बढ़ते हैं।
नियमित तबादले से यह जोखिम काफी हद तक कम होगा। साथ ही, कर्मचारियों को विभिन्न जिलों में कार्य करने का अनुभव मिलेगा, जिससे उनकी दक्षता और समझ भी बढ़ेगी।
इस फैसले के बाद कर्मचारियों के बीच मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ डाटा इंट्री ऑपरेटर इसे प्रशासनिक सुधार का सकारात्मक कदम मान रहे हैं, जबकि कुछ कर्मचारियों को अचानक तबादले से व्यक्तिगत कठिनाइयों की चिंता है। विभाग का कहना है कि तबादले तय मापदंड और संतुलन के साथ किए जाएंगे, ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।
यह कदम खनन विभाग की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और अनुशासित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
