“गुस्ताख इश्क” एक भावनात्मक और रोमांटिक ड्रामा फिल्म है, जो दर्शकों को पुरानी दिल्ली की तंग गलियों, छतों, चायखानों और उर्दू अदब की खुशबू से भरी दुनिया में ले जाती है। यह फिल्म सिर्फ प्रेम कहानी नहीं है, बल्कि शायरी, विरासत और इंसानी रिश्तों की जटिलताओं को भी बेहद नफासत से पेश करती है। विभू पुरी के निर्देशन में बनी यह फिल्म धीमी, मगर गहरी असर छोड़ने वाली सिनेमाई यात्रा है।
फिल्म की कहानी नवाबुद्दीन के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार विजय वर्मा ने निभाया है। नवाबुद्दीन एक ऐसा युवक है, जो उर्दू शायरी से बेहद प्रभावित है और खुद भी शायर बनना चाहता है। इसी तलाश में उसकी मुलाकात मशहूर उर्दू कवि अजीज से होती है, जिनका किरदार नसीरुद्दीन शाह ने निभाया है। अजीज न सिर्फ एक शायर हैं, बल्कि उर्दू तहजीब और सोच के प्रतीक भी हैं।
नवाबुद्दीन जब अजीज से शायरी सीखने आता है, तभी उसकी मुलाकात अजीज की बेटी से होती है, जिसका किरदार फातिमा सना शेख ने निभाया है। दोनों के बीच बातचीत, शेरो-शायरी और चाय की प्यालियों के साथ धीरे-धीरे एक खामोश, मगर गहराता हुआ इश्क जन्म लेता है। यह प्रेम दिखावटी नहीं है, बल्कि शब्दों, एहसासों और नजरों के जरिये पनपता है, जो फिल्म की सबसे बड़ी खूबी है।
हर प्रेम कहानी की तरह गुस्ताख इश्क में भी मुश्किलें आती हैं। कुछ गलतफहमियां, अधूरी बातें और परिस्थितियों का दबाव दोनों को एक-दूसरे से दूर कर देता है। यहां फिल्म यह सवाल उठाती है कि क्या मोहब्बत सिर्फ जज्बात से चलती है या समझ और संवाद भी उतने ही जरूरी हैं। यही टकराव कहानी को भावनात्मक गहराई देता है।
विजय वर्मा ने नवाबुद्दीन के किरदार को बेहद संवेदनशीलता से निभाया है। फातिमा सना शेख की सादगी और भावनात्मक अभिव्यक्ति कहानी को मजबूत बनाती है। नसीरुद्दीन शाह अजीज के रूप में फिल्म की आत्मा हैं, जिनके संवाद और मौजूदगी उर्दू अदब को जीवंत कर देता है। शारिब हाशमी सहायक भूमिका में कहानी को संतुलन प्रदान करते हैं। निर्देशक विभू पुरी ने फिल्म को शोर-शराबे से दूर, शांत और कलात्मक अंदाज में प्रस्तुत किया है।
“गुस्ताख इश्क” उन दर्शकों के लिए है, जो तेज रफ्तार मनोरंजन से हटकर भावनाओं, शायरी और रिश्तों की बारीकियों को महसूस करना चाहते हैं। क्या नवाबुद्दीन और अजीज की बेटी फिर मिल पाते हैं या नहीं, यह जानने के लिए यह फिल्म देखनी होगी। यह एक ऐसी प्रेम कहानी है, जो दिल में उतरती है और देर तक ठहर जाती है।
