महाराष्ट्र में खुला देश का पहला “मेनोपॉज क्लिनिक”

Jitendra Kumar Sinha
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महिलाओं के जीवन में मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है, लेकिन इससे जुड़ी शारीरिक, मानसिक और हार्मोनल समस्याओं पर लंबे समय तक समाज और स्वास्थ्य व्यवस्था में अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया है। इसी कमी को दूर करते हुए महाराष्ट्र सरकार ने देश में पहली बार “मेनोपॉज क्लिनिक” की शुरुआत की है। यह पहल महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर की गई एक दूरदर्शी और संवेदनशील नीति का उदाहरण है।


“मेनोपॉज क्लिनिक” विशेष रूप से 40 से 60 वर्ष की आयु की महिलाओं के लिए तैयार किया गया हैं, जहां रजोनिवृत्ति से जुड़े सभी स्वास्थ्य पहलुओं पर विशेषज्ञ सेवाएं उपलब्ध होगी। इन क्लिनिकों में न केवल शारीरिक लक्षणों का उपचार होगा, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, हार्मोन संतुलन और जीवनशैली से जुड़े मुद्दों पर भी मार्गदर्शन दिया जाएगा।


इन क्लिनिकों में महिलाओं को कई तरह की समग्र स्वास्थ्य सेवाएं मिलेगी। मानसिक स्वास्थ्य परामर्श- अवसाद, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा और चिंता जैसी समस्याओं के लिए काउंसलिंग। हार्मोनल जांच- एस्ट्रोजन और अन्य हार्मोन स्तरों की जांच और उपचार। हृदय स्वास्थ्य जांच- मेनोपॉज के बाद बढ़ने वाले हृदय रोगों के जोखिम को देखते हुए नियमित स्क्रीनिंग। हड्डियों की जांच- ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना) की पहचान और रोकथाम। स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नों के उत्तर- महिलाओं की शंकाओं और मिथकों का वैज्ञानिक समाधान।


महाराष्ट्र सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि “मेनोपॉज क्लिनिक” केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहें। राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में इनकी शुरुआत की जा रही है, ताकि आर्थिक या सामाजिक स्थिति के कारण कोई महिला इस सुविधा से वंचित न रहे।


भारतीय समाज में मेनोपॉज पर खुलकर बात करना अब भी एक तरह का वर्जित विषय माना जाता है। इस पहल से न केवल महिलाओं को चिकित्सकीय सहायता मिलेगी, बल्कि समाज में जागरूकता भी बढ़ेगी। यह कदम महिलाओं को यह संदेश देता है कि उनका स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी अन्य आयु वर्ग का।


महाराष्ट्र सरकार द्वारा शुरू किया गया देश का पहला “मेनोपॉज क्लिनिक” महिलाओं के स्वास्थ्य अधिकारों की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह पहल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकता है। यदि इस तरह की योजनाएं पूरे देश में लागू होती हैं, तो करोड़ों महिलाओं को गरिमापूर्ण, स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने में नई शक्ति मिलेगी।



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