सुप्रीम कोर्ट ने यूपीएससी परीक्षाओं और सरकारी सेवाओं में आरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण और स्पष्ट निर्णय दिया है। अदालत ने कहा है कि यदि किसी अभ्यर्थी ने परीक्षा की किसी भी अवस्था में आरक्षण का लाभ लिया है, तो वह सामान्य श्रेणी (अनारक्षित) की सीट पर नियुक्ति का हकदार नहीं होगा, भले ही उसके प्राप्तांक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवार से अधिक क्यों न हो।
यह मामला भारतीय वन सेवा (IFS) की नियुक्ति से जुड़ा था। एक अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के उम्मीदवार ने यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में आरक्षण का लाभ लिया था। बाद में, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में अच्छे अंक प्राप्त करने के बाद उसने अनारक्षित (जनरल) श्रेणी की सीट पर नियुक्ति की मांग की।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस मांग को स्वीकार करते हुए उम्मीदवार के पक्ष में फैसला दिया था। इसके खिलाफ केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की।
जस्टिस जे. के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने केंद्र सरकार की अपील स्वीकार करते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया।
शीर्ष अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि यदि किसी उम्मीदवार ने परीक्षा की किसी भी अवस्था में आरक्षण का लाभ लिया है, तो वह सामान्य श्रेणी की रिक्त सीट पर नियुक्ति का दावा नहीं कर सकता है, भले ही उसके अंक सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों से अधिक हो।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि आरक्षण का लाभ “पूरी प्रक्रिया” के संदर्भ में देखा जाएगा, न कि केवल अंतिम चयन चरण के आधार पर।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा है कि आरक्षण नीति का उद्देश्य सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों को समान अवसर देना है, न कि दोहरी सुविधा उपलब्ध कराना।
यदि कोई उम्मीदवार आरक्षित श्रेणी के तहत मिलने वाली रियायतें जैसे कट-ऑफ में छूट, आयु सीमा में राहत या आरक्षित सीटों की सुविधा लेता है, तो उसे उसी श्रेणी में गिना जाएगा।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने उम्मीदवार के अधिक अंकों को आधार बनाकर उसे अनारक्षित सीट देने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गलत ठहराते हुए कहा कि यह दृष्टिकोण आरक्षण व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है और इससे सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित होते हैं।
इस निर्णय का यूपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं पर दूरगामी प्रभाव पड़ेगा। अब यह स्पष्ट हो गया है कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को शुरुआत में ही यह तय करना होगा कि वे किस श्रेणी से परीक्षा देना चाहते हैं। एक बार आरक्षण का लाभ लेने के बाद सामान्य सीट पर दावा करने का रास्ता बंद हो जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आरक्षण व्यवस्था में पारदर्शिता और स्पष्टता लाने वाला है। यह निर्णय न केवल नियमों की समान व्याख्या सुनिश्चित करता है, बल्कि सामान्य और आरक्षित, दोनों वर्गों के उम्मीदवारों के अधिकारों के संतुलन को भी बनाए रखता है।
