“फिल्म बाहुबली: द बिगिनिंग” और फिल्म बाहुबली 2: द कन्क्लूजन” को मिलाकर बनाया गया है फिल्म - “बाहुबली द एपिक”

Jitendra Kumar Sinha
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भारतीय सिनेमा के इतिहास में अगर किसी फिल्म फ्रेंचाइजी ने दर्शकों की कल्पना को सबसे गहराई से छुआ है, तो वह है बाहुबली। साल 2015 में आई “बाहुबली: द बिगिनिंग” और 2017 में रिलीज हुई “बाहुबली 2: द कन्क्लूजन” ने न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि भारतीय फिल्मों को वैश्विक पहचान भी दिलाई। अब इन दोनों फिल्मों को मिलाकर बनाई गई “बाहुबली द एपिक” एक बार फिर दर्शकों के सामने है। अक्तूबर में सिनेमाघरों में री-रिलीज के बाद यह फिल्म अब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध है, जिससे नई पीढ़ी के दर्शकों को भी इस महागाथा को एक साथ देखने का मौका मिला है।


करीब 3 घंटे 43 मिनट की इस लंबी फिल्म में बाहुबली की पूरी कहानी को एक क्रमबद्ध और निरंतर प्रवाह में पेश किया गया है। जो दर्शक पहले दोनों फिल्मों को अलग-अलग देख चुके हैं, उनके लिए यह संस्करण एक नए अनुभव जैसा है, क्योंकि यहां कथा बिना किसी बड़े ब्रेक के आगे बढ़ती है। शिवा से लेकर महेंद्र बाहुबली बनने तक की यात्रा, अमरेंद्र बाहुबली की वीरता, देवसेना का साहस, भल्लालदेव की क्रूर महत्वाकांक्षा और शिवगामी देवी का द्वंद्व, सब कुछ एक ही कैनवास पर सघनता से उभरता है।


फिल्म का सबसे बड़ा आकर्षण आज भी इसका भव्य दृश्य संसार है। महिष्मती साम्राज्य की विशालता, युद्ध दृश्यों की कल्पनाशीलता और वीएफएक्स का प्रभावशाली इस्तेमाल आज भी दर्शकों को बांधकर रखता है। एसएस राजामौली का निर्देशन यहां पूरी शान के साथ सामने आता है। उन्होंने जिस तरह पौराणिकता, भावनाओं और एक्शन को संतुलित किया है, वह “बाहुबली द एपिक” में और अधिक स्पष्ट रूप से महसूस होता है।


अभिनय की बात करें तो प्रभास दोनों भूमिकाओं में प्रभावशाली हैं। उनकी देहभाषा और संवाद अदायगी बाहुबली के किरदार को विश्वसनीय बनाती है। राणा दग्गुबाती ने भल्लालदेव के रूप में क्रूरता और अहंकार को सशक्त ढंग से निभाया है। अनुष्का शेट्टी की देवसेना आज भी एक मजबूत और प्रेरणादायक स्त्री पात्र के रूप में याद आती है, जबकि राम्या कृष्णन ने शिवगामी देवी के जटिल चरित्र को गरिमा और तीव्रता के साथ जीवंत किया है। तमन्ना भाटिया का अवंतिका वाला किरदार भी कहानी में भावनात्मक संतुलन जोड़ता है।


संगीत और बैकग्राउंड स्कोर फिल्म की आत्मा हैं। एमएम कीरवानी का संगीत हर दृश्य को भव्यता और भावनात्मक गहराई देता है। “बाहुबली द एपिक” सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि एक अनुभव है, जिसे एक साथ देखने पर इसकी कथा और भी प्रभावी हो जाती है। ओटीटी पर इसकी उपलब्धता ने इसे दोबारा देखने का बेहतरीन अवसर दिया है, जहां दर्शक बिना रुके इस महाकाव्य यात्रा का आनंद ले सकते हैं।

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