इस वर्ष गणतंत्र दिवस की परेड में कर्तव्य पथ पर एक ऐतिहासिक और अनोखा दृश्य देखने को मिलेगा। पहली बार भारतीय सेना अपने पशु दस्ते (Animal Contingent) को परेड में शामिल करने जा रही है। इसमें “बैक्ट्रियन ऊंट”, “जांस्कर पोनी”, “प्रशिक्षित सैन्य श्वान” और “शिकारी पक्षी” शामिल होंगे। यह पहल न केवल सेना की परंपरागत शक्ति का प्रतीक है, बल्कि उन मूक योद्धाओं के प्रति सम्मान भी है, जो कठिन परिस्थितियों में सैनिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की रक्षा करते हैं।
भारतीय सेना की ताकत सिर्फ आधुनिक हथियारों और तकनीक तक सीमित नहीं है। दुर्गम इलाकों, ऊंचे पहाड़ों, बर्फीले रेगिस्तानों और सीमावर्ती क्षेत्रों में आज भी पशु दस्ते सेना की रीढ़ बने हुए हैं। गणतंत्र दिवस परेड में इनका प्रदर्शन आम जनता को यह दिखाने का अवसर होगा कि किस तरह ये मूक साथी सैनिकों के साथ हर चुनौती का सामना करते हैं।
परेड में शामिल होने वाले “बैक्ट्रियन ऊंट” विशेष रूप से लद्दाख के ठंडे रेगिस्तानी क्षेत्रों में तैनात किए जाते हैं। दो कूबड़ वाले ये ऊंट अत्यंत सहनशील होते हैं और लगभग 250 किलोग्राम तक भार ढोने में सक्षम हैं। 15 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर, जहां तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है, वहां भी ये ऊंट बिना थके काम करते हैं। दुर्गम इलाकों में रसद पहुंचाने में इनकी भूमिका बेहद अहम है।
इसी तरह “जांस्कर पोनी” लद्दाख और हिमालयी क्षेत्रों में सेना के लिए अमूल्य संपत्ति हैं। ये छोटे लेकिन बेहद मजबूत घोड़े संकरे पहाड़ी रास्तों, बर्फीली पगडंडियों और ऊंचाई वाले इलाकों में सामान ढोने और सैनिकों की आवाजाही में मदद करते हैं। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में जहां वाहन नहीं पहुंच पाते, वहां जांस्कर पोनी सेना की मददगार बनती हैं।
परेड में “सैन्य श्वान दस्ते” की मौजूदगी भी खास होगी। इसमें भारतीय नस्ल के 10 प्रशिक्षित श्वान और छह अन्य अनुभवी सैन्य श्वान शामिल होंगे। ये श्वान विस्फोटक खोजने, घुसपैठ रोकने, खोज एवं बचाव अभियानों और आतंकवाद विरोधी कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कई बार इन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना सैनिकों और नागरिकों की जान बचाई है।
इसके अलावा “शिकारी पक्षी” भी पहली बार परेड का हिस्सा होंगे। सेना इन पक्षियों का उपयोग निगरानी, हवाई सुरक्षा और ड्रोन जैसे खतरों से निपटने में करती है। प्राकृतिक क्षमता और तीव्र दृष्टि के कारण ये पक्षी आधुनिक युद्ध प्रणाली में भी उपयोगी साबित हो रहे हैं।
गणतंत्र दिवस परेड में पशु दस्ते की भागीदारी भारतीय सेना की बहुआयामी शक्ति और परंपरा का प्रतीक होगी। यह परेड न केवल देश की सैन्य क्षमता का प्रदर्शन करेगी, बल्कि उन मूक योद्धाओं को भी सम्मान देगी, जिनका योगदान अक्सर पर्दे के पीछे रह जाता है, लेकिन जिनके बिना सीमाओं की सुरक्षा अधूरी है।
