हॉरर, फैंटेसी और कॉमेडी का संगम है - फिल्म ‘द राजा साहब’

Jitendra Kumar Sinha
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सुपरस्टार प्रभास की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द राजा साहब’ अब सिनेमाघरों के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्शकों के लिए उपलब्ध है। यह फिल्म पारंपरिक हॉरर या कॉमेडी से हटकर हॉरर-फैंटेसी-कॉमेडी का ऐसा मिश्रण पेश करती है, जिसमें भावनाएं, रहस्य और हल्का-फुल्का हास्य साथ-साथ चलता है। निर्देशक मारुति ने इस फिल्म के जरिए दर्शकों को डराने के साथ-साथ हंसाने और सोचने पर भी मजबूर करने की कोशिश की है।


फिल्म की कहानी राजू उर्फ राजा साहब (प्रभास) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी अल्जाइमर से पीड़ित दादी गंगम्मा के साथ रहता है। गंगम्मा अपने पति कनकराजू के लापता होने के सदमे से उबर नहीं पाई हैं और बार-बार उसे ढूंढ़ने की जिद करती रहती हैं। दादी की इसी जिद और भावनात्मक लगाव के चलते राजू अपने दादा की तलाश में निकल पड़ता है।


यह तलाश उसे एक ऐसी रहस्यमयी हवेली तक ले जाती है, जिसके बारे में कहा जाता है कि वहां असामान्य और भूतिया घटनाएं घटती हैं। हवेली में कदम रखते ही कहानी एक नया मोड़ लेती है, जहां राजू को अपने परिवार के अतीत से जुड़े कई चौंकाने वाले और डरावने राज पता चलता है। क्या यह हवेली सचमुच भूतिया है या इसके पीछे कोई और सच्चाई छिपी है, यह जानने के लिए दर्शकों को फिल्म देखनी होगी।


‘द राजा साहब’ में प्रभास एक ऐसे किरदार में नजर आते हैं, जो मास एंटरटेनर हीरो से अलग है। यहां वे एक भावुक पोते, जिज्ञासु इंसान और कॉमिक टाइमिंग वाले कलाकार के रूप में दिखाई देते हैं। उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी में सहजता दिखती है, जो फिल्म को हल्का और मनोरंजक बनाती है। प्रभास के प्रशंसकों के लिए यह फिल्म उनके अभिनय का एक नया रंग पेश करती है।


फिल्म में संजय दत्त का किरदार रहस्यमयी और प्रभावशाली है, जो कहानी को गहराई देता है। जरीना वहाब गंगम्मा के रूप में भावनात्मक मजबूती लाती हैं और अल्जाइमर से जूझती एक बुजुर्ग महिला की पीड़ा को प्रभावी ढंग से पेश करती हैं। मालविका मोहनन फिल्म में ताजगी और ग्लैमर जोड़ती हैं, जबकि बोमन ईरानी अपने अनुभव से कहानी को संतुलन प्रदान करते हैं।


निर्देशक मारुति ने फिल्म में हॉरर और कॉमेडी के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। कुछ दृश्य जहां डर पैदा करता है, वहीं अगले ही पल हल्का हास्य माहौल को सहज बना देता है। सिनेमैटोग्राफी में हवेली के दृश्य खास तौर पर प्रभावशाली हैं, जो रहस्य और भय का माहौल रचते हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी के उतार-चढ़ाव को सपोर्ट करता है, हालांकि कुछ जगहों पर यह और प्रभावी हो सकता था।


अगर पारंपरिक डरावनी फिल्मों से हटकर कुछ नया देखना हैं, तो ‘द राजा साहब’ एक अच्छा विकल्प है। इसमें परिवार, भावनाएं, रहस्य और मनोरंजन का संतुलित मिश्रण है। यह फिल्म न सिर्फ हॉरर प्रेमियों को, बल्कि कॉमेडी और फैंटेसी पसंद करने वालों को भी आकर्षित करती है।


‘द राजा साहब’ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर एक ऐसी फिल्म है, जिसे परिवार के साथ बैठकर देखा जा सकता है। यह डराने के साथ-साथ हंसाती है और भावनात्मक रूप से जोड़ती भी है। प्रभास के अलग अंदाज़, दमदार सहायक कलाकार और रहस्यमयी कहानी इसे एक बार देखने लायक जरूर बनाती है।



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