बिहार के सरकारी अस्पतालों में प्रसव कराने वाली महिलाओं के लिए एक अहम और राहत देने वाला फैसला लिया गया है। अब अस्पताल से मां की छुट्टी (डिस्चार्ज) होने से पहले ही नवजात बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र बना दिया जाएगा। इस व्यवस्था से न केवल आम लोगों की परेशानियां कम होंगी, बल्कि जन्म पंजीकरण की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और समयबद्ध हो सकेगी।
राज्य के निबंधन के मुख्य रजिस्ट्रार के निर्देश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को स्पष्ट आदेश जारी किया है कि सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले प्रत्येक बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र अस्पताल में ही तैयार कराया जाए। राज्य मुख्यालय से आदेश मिलने के बाद सिविल सर्जन (सीएस) डॉ. अजय कुमार ने सभी अस्पताल प्रभारियों को निर्देश दिया है कि मां को छुट्टी देने से पहले बच्चे का जन्म प्रमाणपत्र बनना अनिवार्य किया जाए।
अब तक स्थिति यह थी कि अस्पताल में बच्चे के जन्म के समय केवल रजिस्ट्रेशन किया जाता था, लेकिन जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए माता-पिता को बाद में नगर निगम, प्रखंड कार्यालय या अन्य संबंधित दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई बार दस्तावेजों की कमी के कारण प्रमाणपत्र बनने में देरी होती थी। कुछ मामलों में महीनों तक जन्म प्रमाणपत्र नहीं बन पाता था। इससे स्कूल नामांकन, आधार कार्ड, सरकारी योजनाओं और पासपोर्ट जैसे जरूरी कार्यों में दिक्कत आती थी। नई व्यवस्था से इन समस्याओं पर काफी हद तक रोक लगेगी।
नए निर्देश के तहत अब अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी बढ़ गई है। प्रसव के बाद बच्चे का विवरण उसी समय पंजीकृत किया जाएगा। मां की छुट्टी से पहले जन्म प्रमाणपत्र तैयार कर उसे उपलब्ध कराया जाएगा। अस्पतालों में संबंधित कर्मियों को इस कार्य के लिए प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके साथ ही अस्पतालों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं और उनके परिजनों को जन्म प्रमाणपत्र की महत्ता के बारे में जागरूक करें।
आज के समय में जन्म प्रमाणपत्र केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं रह गया है। इसकी उपयोगिता लगातार बढ़ती जा रही है। बच्चे के स्कूल में दाखिले के लिए, आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र बनवाने के लिए, सरकारी योजनाओं और छात्रवृत्तियों का लाभ लेने के लिए, पासपोर्ट और वीजा जैसे दस्तावेजों के लिए और उम्र प्रमाण के रूप में विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं में, इन सभी कार्यों में जन्म प्रमाणपत्र अनिवार्य या अत्यंत आवश्यक हो गया है।
इस फैसले से खासतौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। समय और पैसे दोनों की बचत होगी। जन्म के तुरंत बाद प्रमाणपत्र मिलने से भविष्य की योजनाओं में सहूलियत होगी। पंजीकरण की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और गलतियों की संभावना कम होगी।
निबंधन के मुख्य रजिस्ट्रार ने यह भी निर्देश दिया है कि अस्पतालों में आने वाली महिलाओं को जन्म प्रमाण पत्र के महत्व के प्रति जागरूक किया जाए। कई बार जानकारी के अभाव में लोग इस प्रक्रिया को टाल देते हैं, जिससे बाद में परेशानी बढ़ जाती है। अब अस्पताल स्तर पर ही उन्हें समझाया जाएगा कि यह दस्तावेज उनके बच्चे के पूरे जीवन में कितना महत्वपूर्ण है।
स्वास्थ्य विभाग के इस कदम को जन्म पंजीकरण व्यवस्था में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है। यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया, तो भविष्य में राज्य में जन्म प्रमाण पत्र से जुड़ी शिकायतें काफी हद तक कम हो सकती हैं। यह पहल डिजिटल इंडिया और सुशासन की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है।
मां की छुट्टी से पहले बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र बनाना एक दूरदर्शी निर्णय है। इससे न केवल आम नागरिकों को राहत मिलेगी, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था भी अधिक प्रभावी बनेगी। यदि सभी अस्पताल इस निर्देश का सही पालन करें, तो यह बदलाव राज्य के हजारों परिवारों के लिए वरदान साबित हो सकता है।
