मिस्र के पिरामिड से भी पुराना सोना मिला

Jitendra Kumar Sinha
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मानव सभ्यता के इतिहास में सोना केवल धातु नहीं रहा, बल्कि शक्ति, प्रतिष्ठा और आध्यात्मिक विश्वास का प्रतीक रहा है। आमतौर पर जब प्राचीन सोने की बात होती है तो मिस्र के पिरामिड, फिरौन और नील नदी की सभ्यता याद आती है। लेकिन हालिया पुरातात्विक खोज ने इस धारणा को चुनौती दे दी है। बुल्गारिया में मिले 6,500 वर्ष पुराने सोने के गहनों और कलाकृतियों ने साबित कर दिया है कि सोने का उपयोग मिस्र के पिरामिडो से भी हजारों साल पहले शुरू हो चुका था।


यह ऐतिहासिक खोज बुल्गारिया में हुई है, जहां पुरातत्वविदों को एक प्राचीन कब्र में सोने के गहने और कलाकृतियां मिलीं हैं। यह स्थल काला सागर के पश्चिमी तट के पास स्थित है, जिसे इतिहास में प्राचीन यूरोपीय सभ्यताओं का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता रहा है। कार्बन डेटिंग से यह पुष्टि हुई है कि ये वस्तुएं लगभग 4500 ईसा पूर्व की हैं। यानि यह सोना मिस्र के पिरामिडो (जो लगभग 2600 ईसा पूर्व बनाए गए) से भी करीब 2000 साल पुराना है।


विशेषज्ञों के अनुसार, यह खोज यूरोप में अब तक मिला सबसे पुराना सोना है। इन गहनों में हार, कंगन, मोतियों जैसी सजावटी वस्तुएं और कुछ प्रतीकात्मक कलाकृतियां शामिल हैं। यह सोना न केवल उम्र में प्राचीन है, बल्कि इसकी शुद्धता और कारीगरी भी आश्चर्यजनक रूप से उन्नत है। इस खोज ने यह सिद्ध कर दिया है कि यूरोप में धातु कला और सामाजिक संरचना बहुत पहले विकसित हो चुकी थी, जब दुनिया के कई हिस्सों में मानव समुदाय अभी शिकारी-संग्रहकर्ता अवस्था में थे।


सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने हजारों साल पहले भी लोग सोने को गलाने, ढालने और उसे सुंदर गहनों में बदलने की तकनीक जानते थे। उस समय न तो आधुनिक औजार थे और न ही वैज्ञानिक उपकरण, फिर भी सोने को आकार देना, उसे चमकदार बनाना और कलात्मक रूप देना मानव कौशल की अद्भुत मिसाल है। पुरातत्वविदों का मानना है कि यह तकनीकी ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी विकसित हुआ है और समाज के विशेष वर्गों तक सीमित रहा होगा।


इन गहनों का मिलना केवल तकनीकी उन्नति का संकेत नहीं देता है, बल्कि उस समाज की सामाजिक संरचना को भी उजागर करता है। माना जा रहा है कि यह सोना किसी सामान्य व्यक्ति का नहीं था, बल्कि किसी प्रभावशाली या उच्च वर्ग के व्यक्ति की कब्र में रखा गया था। इससे यह संकेत मिलता है कि उस समय भी समाज में वर्ग विभाजन मौजूद था और सोना सत्ता, प्रतिष्ठा और शायद धार्मिक विश्वासों से जुड़ा हुआ था। संभव है कि लोग मृत्यु के बाद के जीवन में भी इन वस्तुओं के उपयोग में विश्वास रखते हों।


अब तक इतिहास की किताबों में मिस्र और मेसोपोटामिया को धातु सभ्यता का प्रारंभिक केंद्र माना जाता रहा है। लेकिन बुल्गारिया की यह खोज बताती है कि यूरोप में भी समानांतर रूप से उन्नत सभ्यताएं विकसित हो रही थी। यह खोज इतिहासकारों को मजबूर कर रही है कि वे मानव सभ्यता के विकास की समयरेखा पर दोबारा विचार करें।


6,500 वर्ष पुराना यह सोना केवल एक पुरातात्विक खोज नहीं है, बल्कि इतिहास की समझ को बदल देने वाला प्रमाण है। यह बताता है कि मानव रचनात्मकता, तकनीकी कौशल और सामाजिक जटिलता बहुत पहले विकसित हो चुकी थी। मिस्र के पिरामिडो से भी पहले चमकता यह सोना आज यह याद दिलाता है कि सभ्यता की जड़ें जितनी गहरी हैं, उतनी ही रहस्यमय और प्रेरक भी।


बुल्गारिया में मिली यह खोज मानव इतिहास के उन अध्यायों को उजागर करती है, जिन्हें अब तक ठीक से समझ नहीं पाए थे। यह सोना न केवल अतीत की संपन्नता का प्रतीक है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि मानव सभ्यता की कहानी कहीं अधिक प्राचीन, व्यापक और समृद्ध है, जितना कल्पना करते रहे हैं।



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