शीतकाल के दौरान बेघर और जरूरतमंद लोगों को राहत देने के उद्देश्य से नगर निगम प्रशासन द्वारा अस्थायी रैन बसेरों की व्यवस्था की जाती है। पटना नगर निगम ने भी ठंड के मौसम में ऐसे रैन बसेरे और जर्मन हैंगर स्थापित किए थे, जहां न सिर्फ ठहरने की सुविधा थी बल्कि कुछ स्थानों पर मुफ्त भोजन की व्यवस्था भी की गई थी। अब मौसम में बदलाव और तापमान में वृद्धि को देखते हुए नगर निगम प्रशासन ने 28 फरवरी से सभी आठ अस्थायी रैन बसेरों को बंद करने का निर्णय लिया है।
नगर निगम प्रशासन के अनुसार, 28 फरवरी से शहर में संचालित सभी आठ अस्थायी रैन बसेरे बंद कर दिए जाएंगे। इसके साथ ही जर्मन हैंगर में मिलने वाली मुफ्त भोजन की सुविधा भी समाप्त कर दी जाएगी। प्रशासन का कहना है कि ये व्यवस्थाएं विशेष रूप से ठंड के मौसम के लिए की गई थीं, ताकि कड़ाके की सर्दी में कोई भी व्यक्ति खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर न हो।
अस्थायी रैन बसेरों को बंद किया जा रहा है, लेकिन राहत की बात यह है कि विभिन्न अंचलों में संचालित छह स्थायी रैन बसेरे पहले की तरह ही कार्यरत रहेंगे। इसके अलावा, शहर में मौजूद 16 जर्मन हैंगर भी यथावत संचालित होते रहेंगे। नगर निगम का दावा है कि इन स्थायी व्यवस्थाओं के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को न्यूनतम आश्रय सुविधा मिलती रहेगी।
अस्थायी रैन बसेरों के साथ संचालित जर्मन हैंगर में दी जाने वाली मुफ्त भोजन व्यवस्था का बंद होना भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। सर्दियों के दौरान यह व्यवस्था न केवल रात में ठहरने वाले लोगों बल्कि दिहाड़ी मजदूरों और फुटपाथ पर रहने वाले गरीबों के लिए भी बड़ी राहत थी। अब इसके बंद होने से कई जरूरतमंद लोगों को भोजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
नगर निगम के इस निर्णय पर सामाजिक संगठनों और स्वयंसेवी संस्थाओं ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि भले ही ठंड कम हो गई हो, लेकिन बेघर लोगों की समस्याएं समाप्त नहीं हुई हैं। कई ऐसे लोग हैं जिनके पास स्थायी ठिकाना नहीं है और वे सालभर रैन बसेरों पर निर्भर रहते हैं। संगठनों ने मांग की है कि कम से कम मुफ्त भोजन जैसी मूलभूत सुविधाएं जारी रखी जाएं।
नगर निगम प्रशासन का तर्क है कि संसाधनों का सीमित और विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी है। अस्थायी रैन बसेरों और मुफ्त भोजन की व्यवस्था पर काफी खर्च आता है, जिसे वर्षभर जारी रखना संभव नहीं है। प्रशासन ने यह भी कहा है कि जरूरतमंद लोगों को स्थायी रैन बसेरों की ओर मार्गदर्शन किया जाएगा और वहां उपलब्ध सुविधाओं को और बेहतर बनाने पर विचार किया जा रहा है।
अस्थायी रैन बसेरों के बंद होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करने की होगी कि कोई भी व्यक्ति बिना आश्रय के न रहे। खासकर ऐसे लोग जो स्थायी रैन बसेरों तक पहुंचने में असमर्थ हैं, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था जरूरी होगी। इसके साथ ही गर्मी के मौसम में पेयजल, स्वास्थ्य और स्वच्छता जैसी सुविधाओं पर भी ध्यान देना आवश्यक होगा।
28 फरवरी से अस्थायी रैन बसेरों और मुफ्त भोजन व्यवस्था का बंद होना नगर निगम की एक नीतिगत निर्णय है, जो मौसम और संसाधनों से जुड़ा हुआ है। यह निर्णय प्रशासनिक दृष्टि से उचित लग सकता है, लेकिन इसके सामाजिक प्रभावों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। जरूरतमंद और बेघर लोगों के लिए स्थायी और दीर्घकालिक समाधान तलाशना समय की मांग है, ताकि शहर में कोई भी व्यक्ति बुनियादी मानवीय सुविधाओं से वंचित न रहे।
