बिहार में सरकारी निर्माण कार्यों को लेकर पटना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी प्रभाव वाला आदेश दिया है। राज्य सरकार की ढांचागत परियोजनाओं में लाल ईंटों के उपयोग पर तत्काल रोक लगाने का निर्देश देते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भवनों, विशेषकर स्कूल भवनों में फ्लाई ऐश ईंटों का ही इस्तेमाल किया जाए। कोर्ट ने कहा कि लाल ईंटों के निर्माण से प्रदूषण बढ़ता है और पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंचती है। यह आदेश जस्टिस संदीप कुमार की एकल पीठ ने ब्रिक्स फर्म द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
लाल ईंटों का निर्माण पारंपरिक भट्ठों में होता है, जहां भारी मात्रा में कोयले और अन्य ईंधनों का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में बड़ी मात्रा में कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसें वातावरण में उत्सर्जित होती हैं। इसके अलावा, ईंट बनाने के लिए उपजाऊ मिट्टी की खुदाई की जाती है, जिससे कृषि भूमि की गुणवत्ता प्रभावित होती है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में इस तथ्य पर गंभीर चिंता जताई है कि पर्यावरण नियमों की अनदेखी करते हुए कई सरकारी परियोजनाओं में लाल ईंटों का इस्तेमाल किया जा रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि विकास कार्यों की आड़ में पर्यावरणीय संतुलन से समझौता नहीं किया जा सकता है।
फ्लाई ऐश ईंटें ताप विद्युत संयंत्रों से निकलने वाली राख (फ्लाई ऐश) से बनाई जाती हैं। यह राख पहले प्रदूषण का कारण मानी जाती थी, लेकिन अब इसका उपयोग निर्माण सामग्री के रूप में किया जा रहा है। फ्लाई ऐश ईंटों के कई लाभ हैं, इसका निर्माण पर्यावरण के लिए कम हानिकारक है। इसमें मिट्टी की खुदाई की आवश्यकता नहीं होती है। यह अधिक मजबूत और टिकाऊ होती हैं। ताप और ध्वनि अवरोधक क्षमता बेहतर होती है। निर्माण लागत अपेक्षाकृत कम पड़ती है। इन्हीं फायदों को देखते हुए केंद्र सरकार भी लंबे समय से सरकारी परियोजनाओं में फ्लाई ऐश ईंटों के उपयोग को बढ़ावा दे रही है। हाईकोर्ट का यह आदेश इसी दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
कोर्ट ने विशेष रूप से यह निर्देश दिया है कि बिहार में बन रहे स्कूल भवनों में लाल ईंटों का उपयोग न किया जाए। शिक्षा से जुड़े बुनियादी ढांचे को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर जोर देते हुए न्यायालय ने कहा है कि बच्चों के भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए पर्यावरण की रक्षा आवश्यक है।
पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी को आदेश दिया गया है कि जोगापट्टी स्थित चिमनिया बाजार में निर्माणाधीन आवासीय स्कूल भवन के प्रोजेक्ट में लाल ईंटों का प्रयोग तत्काल बंद कराया जाए। यह निर्देश स्पष्ट संकेत देता है कि अदालत अपने आदेशों के अनुपालन को लेकर गंभीर है।
हाईकोर्ट ने बिहार सरकार को निर्देश दिया कि राज्य की सभी ढांचागत परियोजनाओं में पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। अदालत ने यह भी कहा है कि यदि नियमों की अनदेखी की गई तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
यह आदेश केवल एक परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे राज्य की निर्माण नीति को प्रभावित करने वाला है। इससे यह संदेश गया है कि अब सरकारी निर्माण कार्यों में पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकार और निर्माण एजेंसियों के सामने नई चुनौती है। उन्हें न केवल वर्तमान परियोजनाओं में बदलाव करना होगा, बल्कि भविष्य की सभी योजनाओं में फ्लाई ऐश ईंटों का प्रावधान सुनिश्चित करना होगा। इसके लिए आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना, गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करना और तकनीकी प्रशिक्षण देना आवश्यक होगा। दीर्घकालिक दृष्टि से यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण, संसाधनों के सतत उपयोग और हरित विकास की दिशा में लाभकारी सिद्ध होगा।
पटना हाईकोर्ट का यह आदेश बिहार में हरित विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाए रखना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। लाल ईंटों पर रोक और फ्लाई ऐश ईंटों के उपयोग को अनिवार्य करने का निर्णय न केवल प्रदूषण को कम करेगा, बल्कि सतत विकास के सिद्धांतों को भी मजबूती देगा।
यदि इस आदेश का प्रभावी ढंग से पालन किया गया, तो बिहार पर्यावरण अनुकूल निर्माण के क्षेत्र में एक उदाहरण बन सकता है। यह फैसला स्पष्ट करता है कि न्यायपालिका पर्यावरण संरक्षण के मुद्दे पर पूरी तरह सजग है और आवश्यक होने पर सख्त कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।
