नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इंडिगो एयरलाइंस को बीते वर्ष दिसंबर में दी गई अस्थायी छूट को समाप्त कर दिया है। अब एयरलाइन को उड़ान ड्यूटी समय सीमा (FDTL – Flight Duty Time Limitation) से जुड़े सभी नियमों का पूर्ण रूप से पालन करना होगा। डीजीसीए की ओर से जारी आधिकारिक नोट में स्पष्ट किया गया है कि इंडिगो अब सभी कानूनी प्रावधानों और नए लागू किए गए ड्यूटी टाइम नियमों का पालन करने के लिए तैयार है। यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब बीते वर्ष दिसंबर में नियमों के सख्त अनुपालन के कारण बड़ी संख्या में उड़ानें प्रभावित हुई थीं।
एफडीटीएल यानि ‘फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन’ नियम पायलटों और केबिन क्रू के कार्य घंटों को नियंत्रित करता है। इन नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विमान चालक दल को पर्याप्त विश्राम मिले, जिससे थकान के कारण उड़ान सुरक्षा पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
नए नियमों के तहत पायलटों के लिए अधिकतम ड्यूटी समय, न्यूनतम विश्राम अवधि, रात की उड़ानों के लिए विशेष प्रावधान और साप्ताहिक विश्राम के मानदंड तय किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस तरह के नियमों को विमानन सुरक्षा का मूल आधार माना जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पायलटों की थकान सीधे तौर पर उड़ान सुरक्षा से जुड़ी होती है। ऐसे में एफडीटीएल नियम न केवल कर्मचारियों के हित में हैं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी अत्यंत आवश्यक हैं।
बीते वर्ष दिसंबर की शुरुआत में जब एफडीटीएल से जुड़े संशोधित नियम लागू हुए, तब इंडिगो सहित कई एयरलाइंस को अपनी उड़ान संचालन व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा। इंडिगो, जो देश की सबसे बड़ी घरेलू एयरलाइन है, उसकी बड़ी संख्या में उड़ानें अचानक प्रभावित हो गईं।
देश के प्रमुख हवाई अड्डों यथा- दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, हैदराबाद और कोलकाता, पर यात्रियों को लंबी देरी, उड़ान रद्द होने और पुनर्निर्धारण जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। कई यात्रियों ने सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी भी जाहिर की थी।
स्थिति को नियंत्रित करने और यात्रियों को राहत देने के लिए डीजीसीए ने इंडिगो को कुछ नियमों में अस्थायी छूट प्रदान की थी। इसका उद्देश्य था कि एयरलाइन को नए नियमों के अनुरूप अपने संचालन को व्यवस्थित करने के लिए समय मिल सके।
बुधवार को जारी आधिकारिक नोट में डीजीसीए ने कहा है कि इंडिगो ने अपने संचालन तंत्र में आवश्यक बदलाव कर लिए हैं और अब वह एफडीटीएल के सभी नियमों का पालन करने में सक्षम है। इसी आधार पर दी गई अस्थायी छूट को समाप्त कर दिया गया है।
यह कदम दर्शाता है कि नियामक संस्था विमानन सुरक्षा के मामले में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतना चाहती है। डीजीसीए ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में किसी भी एयरलाइन को नियमों के पालन में लापरवाही की अनुमति नहीं दी जाएगी।
छूट समाप्त होने के बाद यात्रियों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या फिर से उड़ानों में व्यवधान देखने को मिल सकता है। इंडिगो ने भरोसा दिलाया है कि उसने अपने पायलटों और क्रू की संख्या में वृद्धि की है तथा शेड्यूलिंग सिस्टम को बेहतर बनाया है।
यदि एयरलाइन ने वास्तव में अपने संसाधनों का समुचित प्रबंधन कर लिया है, तो यात्रियों को किसी बड़ी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। बल्कि, दीर्घकालिक दृष्टि से देखें तो सख्त नियमों का पालन यात्रियों के लिए अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय उड़ान अनुभव सुनिश्चित करेगा।
डीजीसीए का यह कदम पूरे विमानन उद्योग के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि सुरक्षा से समझौता स्वीकार्य नहीं है। भारत का विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है, और घरेलू यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में परिचालन दबाव के बीच सुरक्षा मानकों को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक हो जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइंस को अपने मानव संसाधन और तकनीकी ढांचे में निवेश बढ़ाना होगा। पायलटों की पर्याप्त भर्ती, उन्नत शेड्यूलिंग सॉफ्टवेयर और बेहतर समन्वय प्रणाली ही भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचा सकती है।
इंडिगो को दी गई अस्थायी छूट का समाप्त होना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णय है। यह स्पष्ट करता है कि डीजीसीए यात्रियों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संचालन को प्राथमिकता देता है।
अल्पकाल में कुछ परिचालन चुनौतियाँ सामने आ सकती हैं, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से यह कदम विमानन क्षेत्र को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगा। यात्रियों के लिए यह भरोसे का संकेत है कि नियामक संस्था उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च मानती है और किसी भी परिस्थिति में नियमों के पालन से समझौता नहीं किया जाएगा।
