एक मार्च से सिम कार्ड के बिना मैसेजिंग ऐप्स पर लग जाएगा ब्रेक

Jitendra Kumar Sinha
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केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘सिम बाइंडिंग’ (SIM Binding) नियमों को लागू करने की 28 फरवरी की समयसीमा आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि 1 मार्च से मोबाइल में सक्रिय सिम कार्ड के बिना लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप्स काम नहीं करेगा। सरकार के मुताबिक यह कदम साइबर फ्रॉड, फर्जी अकाउंट और पहचान छिपाकर अपराध करने वालों पर लगाम कसने के लिए उठाया गया है।


‘सिम बाइंडिंग’ का मतलब है कि मैसेजिंग ऐप्स को चलाने के लिए मोबाइल नंबर और सिम कार्ड का सक्रिय एवं वैध होना अनिवार्य होगा। यानि ऐप अकाउंट किसी फिजिकल सिम से जुड़ा रहेगा, न कि सिर्फ इंटरनेट या वर्चुअल सेटअप से। 


सरकार का कहना है कि इससे फर्जी/वर्चुअल नंबर से बने अकाउंट्स पर रोक लगेगी। अपराध के बाद आरोपी की ट्रेसेबिलिटी आसान होगी। साइबर ठगी, फेक प्रोफाइल और स्पैम नेटवर्क कमजोर होंगे।


नए नियमों के तहत यदि फोन में सिम कार्ड नहीं है या सिम निष्क्रिय है, तो WhatsApp, Telegram, Signal, Snapchat, ShareChat और JioChat ऐप्स काम नहीं करेंगे।


बहुत से यूज़र कंप्यूटर पर व्हाट्सऐप वेब/डेस्कटॉप का इस्तेमाल करते हैं। नए नियमों के अनुसार, अगर मोबाइल में सिम कार्ड नहीं है, तो कंप्यूटर पर लॉगिन 6 घंटे के भीतर ऑटो-लॉगआउट हो जाएगा। यानि डेस्कटॉप पर लगातार चैट करने के लिए भी मोबाइल में सक्रिय सिम होना जरूरी होगा।


सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल अरेस्ट स्कैम, फर्जी केवाईसी, ओटीपी फ्रॉड, और फेक प्रोफाइल से ठगी जैसी घटनाओं में तेजी आई है। इनमें से अधिकतर मामलों में वर्चुअल नंबर, विदेशी सिम या अस्थायी अकाउंट्स का इस्तेमाल किया गया है।


सरकार मानती है कि सिम बाइंडिंग से अपराधियों की पहचान और नेटवर्क तक पहुंच आसान होगी, जिससे कानून-व्यवस्था मजबूत होगी।


जो लोग केवल वाई-फाई पर टैबलेट या सेकेंडरी फोन में ऐप चलाते थे, उन्हें अब सिम डालना होगा। अगर सिम निष्क्रिय हो जाता है, तो ऐप्स भी बंद हो सकता है। ऐसे में रोमिंग या ई-सिम का विकल्प रखना जरूरी होगा।


कुछ यूज़र मानते हैं कि इससे डिजिटल प्राइवेसी पर असर पड़ सकता है, क्योंकि अकाउंट सीधे मोबाइल नंबर से बंधा रहेगा। हालांकि सरकार का दावा है कि कंटेंट नहीं, केवल पहचान का सत्यापन होगा।


मोबाइल में सक्रिय सिम कार्ड रखना होगा। सिम आपके नाम पर और केवाईसी अपडेटेड होना चाहिए। ऐप्स को लेटेस्ट वर्जन में अपडेट रखना होगा और लंबे समय तक सिम हटाकर ऐप चलाने से बचना होगा।


‘सिम बाइंडिंग’ नियम डिजिटल सुरक्षा की दिशा में सरकार का बड़ा कदम है। इससे जहां साइबर अपराधियों पर नकेल कसी जा सकेगी, वहीं आम यूजर्स को थोड़ी अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। 1 मार्च के बाद मैसेजिंग की दुनिया में एक साफ संदेश है “सिम है, तो चैट है।”



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