केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए लेबर कोड के खिलाफ देशभर में मजदूर संगठनों का विरोध तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में 12 फरवरी को ऐक्टू (ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस) सहित 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त आह्वान पर देशव्यापी आम हड़ताल की घोषणा की गई है। इस हड़ताल को सफल बनाने के लिए बिहार की राजधानी पटना में निर्माण मजदूरों, सफाई कर्मियों और ठेका मजदूरों के बीच व्यापक अभियान चलाया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने श्रम कानूनों को सरल बनाने के नाम पर चार लेबर कोड लागू किए हैं, लेकिन ट्रेड यूनियनों का आरोप है कि यह कोड मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करता हैं। यूनियनों के अनुसार, नए कानूनों से स्थायी रोजगार की सुरक्षा घटेगी, ठेका प्रथा को बढ़ावा मिलेगा और काम के घंटे बढ़ने की आशंका है। इसके साथ ही यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकारों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से अंकुश लगाया गया है।
ऐक्टू के सचिव रणविजय कुमार के अनुसार, पटना के विभिन्न इलाकों में निर्माण मजदूरों, सफाई मजदूरों और ठेका कर्मचारियों के बीच लगातार बैठकें, जनसंपर्क और पर्चा वितरण के जरिए अभियान चलाया जा रहा है। मजदूरों को यह समझाया जा रहा है कि लेबर कोड उनके रोजमर्रा के जीवन और भविष्य की सुरक्षा पर किस तरह असर डाल सकता है। अभियान का उद्देश्य सिर्फ हड़ताल में भागीदारी बढ़ाना नहीं है, बल्कि मजदूरों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक करना भी है।
देशव्यापी हड़ताल का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि इसमें 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनें एकजुट होकर शामिल हो रही हैं। आमतौर पर वैचारिक मतभेदों के कारण ट्रेड यूनियनों में एकरूपता कम देखने को मिलती है, लेकिन लेबर कोड के मुद्दे पर सभी संगठनों ने साझा मंच बनाया है। इससे यह संकेत मिलता है कि मजदूर वर्ग के बीच असंतोष गहरा है और सरकार की नीतियों पर व्यापक पुनर्विचार की मांग की जा रही है।
हड़ताल के जरिए मजदूर संगठनों की कई प्रमुख मांगें हैं। इनमें लेबर कोड को वापस लेने या उनमें मजदूर हितैषी संशोधन करने, न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने, सामाजिक सुरक्षा के दायरे को बढ़ाने, ठेका और अस्थायी कामगारों को स्थायी कर्मचारियों के समान अधिकार देने जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अलावा महंगाई पर नियंत्रण और बेरोजगारी कम करने की ठोस नीति की भी मांग की जा रही है।
12 फरवरी की आम हड़ताल केवल एक दिन का विरोध नहीं है, बल्कि यह मजदूरों की सामूहिक आवाज है। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि अगर सरकार ने मजदूर विरोधी नीतियों पर पुनर्विचार नहीं किया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। यह हड़ताल सरकार के साथ-साथ समाज के अन्य वर्गों के लिए भी संदेश है कि विकास की प्रक्रिया में मजदूरों की अनदेखी नहीं की जा सकती है।
पटना सहित पूरे देश में चल रहा यह अभियान दर्शाता है कि मजदूर वर्ग अपने अधिकारों को लेकर सजग हो रहा है। 12 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल लेबर कोड के खिलाफ एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस आंदोलन को किस तरह लेती है और क्या मजदूरों की चिंताओं को दूर करने के लिए कोई सकारात्मक पहल की जाती है या नहीं।
