केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए 1 अप्रैल से पूरे देश में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल (ई-20) की बिक्री को अनिवार्य कर दिया है। यह कदम भारत की ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है। नए मानक के तहत ई-20 पेट्रोल का न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 होना जरूरी होगा, जिससे इंजन की कार्यक्षमता और दहन गुणवत्ता बेहतर बनी रहे।
ई-20 पेट्रोल का अर्थ है ऐसा ईंधन जिसमें 20 प्रतिशत एथेनॉल और 80 प्रतिशत पारंपरिक पेट्रोल मिश्रित होता है। एथेनॉल एक जैव-ईंधन है, जो गन्ना, मक्का और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसका उपयोग पेट्रोल में मिलाने से जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटती है और कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है।
सरकार पिछले कुछ वर्षों से एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ा रही थी। पहले ई-10 (10 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण) का लक्ष्य रखा गया था, जिसे कई राज्यों में समय से पहले ही हासिल कर लिया गया। इसके बाद ई-20 की ओर कदम बढ़ाया गया है। अब 1 अप्रैल से इसे पूरे देश में लागू करना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम होगा और विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
ऑटोमोबाइल उद्योग भी इस बदलाव के लिए काफी हद तक तैयार है। 2023-25 के बाद भारत में निर्मित अधिकांश नए वाहन ई-20 अनुकूल (E20-compliant) डिजाइन के साथ बनाए जा रहे हैं। इन इंजनों में फ्यूल लाइन, सील और अन्य पुर्जे ऐसे होते हैं जो अधिक एथेनॉल मिश्रण को आसानी से सहन कर सकते हैं। नए वाहनों के लिए ई-20 अपनाना तकनीकी रूप से कोई बड़ी चुनौती नहीं होगी।
पुराने वाहनों के लिए यह बदलाव पूरी तरह सहज नहीं हो सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ई-20 पेट्रोल के इस्तेमाल से पुराने इंजनों में माइलेज थोड़ा कम हो सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक उपयोग करने पर कुछ वाहनों में रबर सील या फ्यूल पाइप से जुड़ी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं। फिर भी, सरकार और तेल कंपनियां आश्वस्त कर रही हैं कि अधिकांश पेट्रोल वाहन सीमित जोखिम के साथ ई-20 का उपयोग कर सकेंगे, खासकर यदि उनका रखरखाव ठीक से किया जाए।
ई-20 पेट्रोल का सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण को होगा। एथेनॉल मिश्रण से कार्बन मोनोऑक्साइड और अन्य हानिकारक गैसों का उत्सर्जन कम होता है। इससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और जलवायु परिवर्तन से निपटने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही, एथेनॉल एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है, जिससे पेट्रोलियम आधारित ईंधनों पर निर्भरता घटेगी।
एथेनॉल उत्पादन का सीधा लाभ किसानों को भी मिलेगा। गन्ना, मक्का और अन्य फसलों की मांग बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। चीनी मिलों और डिस्टिलरी उद्योग को भी इससे नया बाजार मिलेगा, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
आम उपभोक्ता के लिए पेट्रोल पंप पर ई-20 पेट्रोल ही उपलब्ध होगा। कीमतों में बहुत बड़े बदलाव की संभावना फिलहाल नहीं जताई जा रही है, लेकिन माइलेज में हल्का अंतर महसूस किया जा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि वाहन मालिक अपने वाहन की कंपनी से ई-20 अनुकूलता की जानकारी जरूर लें।
ई-20 पेट्रोल को अनिवार्य करना भारत की ऊर्जा नीति में एक निर्णायक कदम है। इससे न केवल पर्यावरण और अर्थव्यवस्था को लाभ होगा, बल्कि देश आत्मनिर्भर ऊर्जा व्यवस्था की ओर भी आगे बढ़ेगा। कुछ चुनौतियों के बावजूद, यह फैसला दीर्घकाल में भारत के लिए सकारात्मक साबित होने की उम्मीद है।
