राजस्थान के नाथद्वारा स्थित श्रीनाथजी मंदिर में बुजुर्गों और दिव्यांग वैष्णव दर्शनार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील कदम उठाया गया है। पुष्टिमार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधानपीठ माने जाने वाले इस पवित्र धाम में अब दर्शन सभी के लिए और अधिक सहज, सुलभ और सम्मानजनक बन गए हैं। हाल ही में मंदिर प्रशासन द्वारा एक विशेष व्हीलचेयर कॉरिडोर का उद्घाटन किया गया, जिससे चलने-फिरने में असमर्थ या असुविधा झेलने वाले श्रद्धालु भी बिना कठिनाई के प्रभु श्रीनाथजी के दर्शन कर सकेंगे।
इस नए व्हीलचेयर कॉरिडोर का शुभारंभ उत्थापन के दर्शनों के दौरान किया गया। उद्घाटन के अवसर पर लगभग 10 बुजुर्ग और दिव्यांग दर्शनार्थियों को इसी कॉरिडोर के माध्यम से श्रीनाथजी के दर्शन कराए गए। यह क्षण न केवल उनके लिए बल्कि मंदिर प्रशासन और उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए भी भावनात्मक और प्रेरणादायक रहा। लंबे समय से ऐसी सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतोष और श्रद्धा स्पष्ट दिखाई दी।
नई व्यवस्था के तहत बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को प्रीतमपोल द्वार से प्रवेश दिया जाएगा। यहां उनके लिए एक विशेष कतार बनाई गई है, जिससे वे सामान्य भीड़ से अलग सुरक्षित और आरामदायक तरीके से आगे बढ़ सकें। इस कतार से होते हुए श्रद्धालुओं को कमल चौक के द्वार तक लाया जाएगा, जहां से व्हीलचेयर उपलब्ध कराई जाएगी।
व्हीलचेयर कॉरिडोर के माध्यम से दर्शनार्थियों को सीधे श्रीजी के दर्शन करवाए जाएंगे और दर्शन पूर्ण होने के बाद उन्हें सुरक्षित रूप से बाहर तक छोड़ने की व्यवस्था रहेगी। यह पूरी प्रक्रिया इस तरह डिजाइन की गई है कि श्रद्धालु को न तो धक्का-मुक्की का सामना करना पड़े और न ही लंबे समय तक खड़े रहना पड़े।
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह सेवा पूर्णतः निशुल्क होगी। हालांकि, व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने और भीड़ प्रबंधन के लिए दर्शनार्थियों को पूर्व रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सीमित संसाधनों के बावजूद अधिकतम जरूरतमंद श्रद्धालुओं को लाभ मिल सके और दर्शन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
अब तक श्रीनाथजी मंदिर में दर्शन के लिए लंबी कतारें, भीड़ और संकरे मार्ग बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों के लिए बड़ी चुनौती बने रहते थे। कई श्रद्धालु शारीरिक असमर्थता के कारण चाहकर भी दर्शन नहीं कर पाते थे या उन्हें अत्यधिक कष्ट सहना पड़ता था। नया व्हीलचेयर कॉरिडोर उनके लिए न केवल शारीरिक राहत लेकर आया है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतोष भी प्रदान कर रहा है। यह पहल यह संदेश देती है कि भक्ति के मार्ग में किसी को भी पीछे नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
नाथद्वारा का यह प्रयास देशभर के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है। आज जब “सुलभता” और “समावेशिता” जैसे मूल्य समाज के केंद्र में हैं, तब धार्मिक संस्थानों द्वारा इस तरह की सुविधाएं शुरू करना समय की मांग है। यह कॉरिडोर यह दर्शाता है कि परंपरा और आधुनिक सुविधाएं साथ-साथ चल सकती हैं, बशर्ते उद्देश्य श्रद्धालुओं की सेवा और सम्मान का हो।
श्रीनाथजी मंदिर में शुरू किया गया व्हीलचेयर कॉरिडोर केवल एक भौतिक सुविधा नहीं है, बल्कि सेवा, संवेदना और समानता का प्रतीक है। इससे बुजुर्ग और दिव्यांग वैष्णवों को यह विश्वास मिला है कि प्रभु के दर्शन का अधिकार सभी के लिए समान है। नाथद्वारा की यह पहल निश्चित रूप से श्रद्धा और सेवा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम करेगी और आने वाले समय में अन्य तीर्थस्थलों को भी इसी दिशा में प्रेरित करेगी।
