भारत को मिला अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी टूर्नामेंट की मेजबानी

Jitendra Kumar Sinha
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भारत को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता की मेजबानी का मौका मिला है। लगभग 22 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद देश में इस खेल का बड़ा आयोजन होने जा रहा है। वर्ष 2027 में एशिया कप तीरंदाजी प्रतियोगिता के दूसरे चरण का आयोजन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में किया जाएगा। इस निर्णय को कोलकाता में आयोजित विश्व तीरंदाजी एशिया (World Archery Asia) की बैठक में मंजूरी दी गई।


इस फैसले को भारतीय तीरंदाजी के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे न केवल खेल को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की खेल आयोजन क्षमता भी मजबूत होगी। भारत लंबे समय से ऐसे बड़े आयोजनों की मेजबानी करने की इच्छा जता रहा था और अब यह अवसर देश को प्राप्त हुआ है।


भारत ने आखिरी बार वर्ष 2005 में किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी टूर्नामेंट की मेजबानी की थी। उस समय दिल्ली में एशियाई तीरंदाजी चैंपियनशिप का सफल आयोजन हुआ था। इसके बाद से लगभग दो दशक तक देश को इस स्तर के आयोजन की जिम्मेदारी नहीं मिली। अब 2027 में एशिया कप तीरंदाजी के दूसरे चरण की मेजबानी मिलने से भारतीय खेल जगत में उत्साह का माहौल है। इस प्रतियोगिता में एशिया के कई शीर्ष तीरंदाज हिस्सा लेंगे। इससे भारतीय खिलाड़ियों को घरेलू मैदान पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा और खेल के प्रति युवाओं की रुचि भी बढ़ेगी।


विश्व तीरंदाजी एशिया के अध्यक्ष काजी राजीब उद्दीन अहमद चापोल इन दिनों भारत के दौरे पर हैं। उन्होंने कोलकाता में आयोजित बैठक में भाग लिया और भारतीय तीरंदाजी से जुड़े अधिकारियों के साथ चर्चा की। इस दौरान उन्होंने आर्चरी एसोसिएशन ऑफ इंडिया के महासचिव वीरेंद्र सचदेवा से मुलाकात की। बैठक में भविष्य में होने वाले अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की मेजबानी और खेल के विकास को लेकर विस्तार से बातचीत हुई। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत के पास बड़े खेल आयोजनों के लिए बेहतर बुनियादी ढांचा और प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं।


भारत में तीरंदाजी का इतिहास काफी पुराना रहा है। पारंपरिक रूप से यह खेल देश के कई हिस्सों में लोकप्रिय रहा है, विशेष रूप से झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों में। पिछले कुछ वर्षों में भारतीय तीरंदाजों ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन किया है। ओलंपिक, विश्व कप और एशियाई खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने कई पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया है। यही वजह है कि विश्व तीरंदाजी एशिया ने भारत को फिर से मेजबानी का अवसर देने का निर्णय लिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट आयोजित होने से खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय प्रतिस्पर्धा का अनुभव मिलेगा और खेल की लोकप्रियता भी बढ़ेगी।


दिल्ली में होने वाला एशिया कप तीरंदाजी का दूसरा चरण खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों दोनों के लिए खास होगा। घरेलू दर्शकों के सामने खेलने से खिलाड़ियों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और उन्हें बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी। इसके अलावा यह आयोजन युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरित करेगा। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी ऐसे होते हैं जिन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को करीब से देखने और उनसे सीखने का अवसर नहीं मिल पाता है। इस तरह के आयोजनों से उन्हें सीखने और आगे बढ़ने का मौका मिलेगा।


किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजन से केवल खेल जगत ही नहीं, बल्कि पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा होता है। एशिया कप तीरंदाजी में विभिन्न देशों के खिलाड़ी, कोच, अधिकारी और दर्शक भारत आएंगे। इससे होटल, परिवहन और अन्य सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा। साथ ही भारत को वैश्विक स्तर पर एक अच्छे खेल आयोजन स्थल के रूप में पहचान मिलेगी।


2027 में एशिया कप तीरंदाजी की मेजबानी भारत के लिए केवल एक खेल आयोजन नहीं है, बल्कि भविष्य की संभावनाओं का संकेत भी है। यदि यह प्रतियोगिता सफलतापूर्वक आयोजित होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत को और भी बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों की मेजबानी मिल सकती है। भारतीय तीरंदाजी संघ और खेल मंत्रालय भी इस अवसर को खेल के विकास के लिए महत्वपूर्ण मान रहे हैं। उम्मीद की जा रही है कि इस आयोजन के माध्यम से देश में तीरंदाजी को नई पहचान और प्रोत्साहन मिलेगा। इस प्रकार 22 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद भारत में फिर से अंतरराष्ट्रीय तीरंदाजी प्रतियोगिता का आयोजन होना भारतीय खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक क्षण साबित हो सकता है।



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