अगर आपको कोर्टरूम ड्रामा और सस्पेंस थ्रिलर फिल्में पसंद हैं, तो Accused आपके लिए एक गंभीर और सोचने पर मजबूर कर देने वाला अनुभव बन सकती है। यह फिल्म न केवल अपराध और न्याय की प्रक्रिया को दिखाती है, बल्कि समाज की उस मानसिकता पर भी सवाल उठाती है, जहां आमतौर पर आरोपी की एक तयशुदा छवि बना ली जाती है। खास बात यह है कि यहां आरोपी कोई पुरुष नहीं, बल्कि एक महिला है और यहीं से कहानी एक नया मोड़ लेती है।
फिल्म की केंद्र में हैं डॉ. गीतिका, जिनकी भूमिका में Konkona Sen Sharma नजर आती हैं। एक सफल, आत्मविश्वासी और प्रोफेशनल महिला की जिन्दगी उस वक्त पूरी तरह बदल जाती है, जब उन पर कार्यस्थल पर यौन दुराचार का आरोप लगता है। आरोप लगते ही सवाल सिर्फ कानून का नहीं रह जाता है, बल्कि समाज, मीडिया और सहकर्मियों के नजरिए का भी बन जाता है।
फिल्म यह दिखाती है कि एक आरोप कैसे किसी इंसान की वर्षों की मेहनत, प्रतिष्ठा और पहचान को पलभर में संदेह के घेरे में ला देता है। कहानी किसी सनसनीखेज ट्विस्ट पर नहीं है, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव, नैतिक दुविधाओं और सामाजिक प्रतिक्रियाओं पर टिकी है।
अधिकतर फिल्मों में यौन अपराध के मामलों में आरोपी पुरुष को दिखाया जाता है। Accused इस स्थापित पैटर्न को तोड़ती है। यहां सवाल यह नहीं कि आरोप सही है या गलत, बल्कि यह है कि जब आरोपी महिला हो, तब समाज और कानून कैसे प्रतिक्रिया देते हैं।
फिल्म बहुत बारीकी से यह दिखाती है कि क्या महिला आरोपी को “कम खतरनाक” माना जाता है? क्या उस पर उतनी ही सख्ती से सवाल उठाए जाते हैं? या फिर नैतिक निर्णय पहले ही सुना दिए जाते हैं? यही उलटफेर इस फिल्म को अलग और प्रासंगिक बनाता है।
Konkona Sen Sharma ने एक बार फिर साबित किया है कि वह आंतरिक उथल-पुथल, डर, गुस्सा और असहायता को बिना शोर किए पर्दे पर उतारने में माहिर हैं। डॉ. गीतिका के रूप में उनका अभिनय नियंत्रित, गहराई भरा और विश्वसनीय है। सहायक भूमिकाओं में Pratibha Ranta समेत अन्य कलाकार कहानी को मजबूती देते हैं और कोर्टरूम तथा निजी दृश्यों को वास्तविक बनाते हैं।
फिल्म का निर्देशन Anubhuti Kashyap ने किया है। उनका फोकस ड्रामेटिक शोर पर नहीं है, बल्कि साइलेंस, असहज संवादों और छोटे-छोटे रिएक्शंस पर है। यही वजह है कि फिल्म बांधे रखती है और धीरे-धीरे अंदर तक उतरती है।
कैमरा वर्क और बैकग्राउंड स्कोर जानबूझकर संयमित रखे गए हैं, ताकि कहानी और पात्र केंद्र में रहें। कोर्टरूम के दृश्य किसी टीवी ड्रामा जैसे नहीं, बल्कि वास्तविक जीवन की जटिलताओं के करीब लगते हैं।
Accused किसी फैसले को थोपती नहीं है। यह दर्शक के सामने सवाल रखती है क्या आरोप लगना ही दोषी ठहराए जाने के बराबर है? न्याय की प्रक्रिया में सामाजिक पूर्वाग्रह कितनी बड़ी भूमिका निभाते हैं? क्या “पीड़ित” और “आरोपी” की परिभाषाएं हमेशा स्पष्ट होती हैं? फिल्म यह भी दिखाती है कि ऐसे मामलों में मानसिक स्वास्थ्य, प्रोफेशनल जीवन और पारिवारिक रिश्ते किस तरह टूटने की कगार पर आ जाते हैं।
Accused मनोरंजन से ज्यादा एक अनुभव है। यह असहज करती है, सवाल पूछने पर मजबूर करती है और अंत तक किसी आसान निष्कर्ष पर नहीं पहुंचने देती। कोंकणा सेन शर्मा का सधा हुआ अभिनय और अनुभूति कश्यप का संवेदनशील निर्देशन इसे एक प्रभावशाली, विचारोत्तेजक फिल्म बनाता है, जिसे देखने के बाद भी लंबे समय तक इसके बारे में सोचते रहेंगे।
