मछलियाँ आंखें बंद नहीं करती है

Jitendra Kumar Sinha
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प्रकृति ने हर जीव को उसके वातावरण के अनुसार विशेष गुण दिए हैं। जैसे पक्षियों को उड़ने के लिए पंख, ऊंट को रेगिस्तान के लिए विशेष शारीरिक बनावट और मछलियों को पानी में रहने के लिए खास संरचना। इन्हीं विशेषताओं में से एक है,  मछलियों की आंखों का कभी बंद न होना। अक्सर बच्चों और बड़ों के मन में यह सवाल आता है कि मछलियां पलक क्यों नहीं झपकातीं? क्या वे सोती नहीं हैं? क्या उनकी आंखें थकती नहीं होंगी?

इंसानों, कुत्तों, बिल्लियों और अन्य स्थलीय जानवरों की आंखों पर पलकें होती हैं। पलकें दो मुख्य काम करती हैं। पहला आंखों को सूखने से बचाना। दूसरा धूल-मिट्टी और बाहरी कणों से सुरक्षा करना। लेकिन मछलियां पूरी तरह पानी में रहती हैं। पानी उनकी आंखों को हमेशा नम और साफ बनाए रखता है। इसलिए उन्हें आंखें गीली रखने के लिए पलक झपकाने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। उनकी आंखों की बाहरी सतह पर एक पारदर्शी परत होती है, जो पानी के अंदर स्वाभाविक रूप से सुरक्षित रहती है। इस प्रकार, पानी ही उनकी आंखों के लिए प्राकृतिक मॉइस्चराइज़र का काम करता है।

यह एक रोचक तथ्य है कि मछलियां भी सोती हैं, लेकिन उनका सोने का तरीका इंसानों से अलग होता है। जब मछलियां आराम करती हैं, तो वे किसी शांत स्थान पर तैरना धीमा कर देती हैं या स्थिर हो जाती हैं। इस दौरान उनकी गतिविधि कम हो जाती है, लेकिन वे पूरी तरह अचेत नहीं होतीं हैं। क्योंकि उनके पास पलकें नहीं होतीं हैं, इसलिए वे सोते समय भी आंखें खुली रखती हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि वे जाग रही हैं, बल्कि उनका मस्तिष्क विश्राम की अवस्था में होता है। कुछ मछलियां रात में सक्रिय होती हैं और दिन में आराम करती हैं, जबकि कुछ दिन में सक्रिय रहती हैं और रात में विश्राम करती हैं। यह उनकी प्रजाति पर निर्भर करता है।

मछलियों की आंखें गोल और उभरी हुई होती हैं, जिससे वे चारों ओर का दृश्य आसानी से देख सकें। पानी में प्रकाश का व्यवहार जमीन से अलग होता है, इसलिए उनकी आंखों की संरचना भी विशेष होती है। उनकी आंखों में लेंस अधिक गोलाकार होता है, जिससे पानी में साफ दृष्टि मिलती है। साथ ही, कई गहरे समुद्र में रहने वाली मछलियों की आंखें अंधेरे में देखने के लिए अधिक संवेदनशील होती हैं। कुछ विशेष प्रजातियों में, जैसे शार्क, आंखों पर एक पतली सुरक्षात्मक झिल्ली होती है, जो शिकार करते समय आंखों को चोट से बचाती है। लेकिन सामान्य मछलियों में पलकें नहीं होती हैं।

अधिकांश मछलियों में पलकें नहीं होतीं हैं, लेकिन कुछ विशेष प्रकार की मछलियों में आंशिक झिल्ली जैसी संरचना पाई जाती है। उदाहरण के लिए, कुछ शार्क प्रजातियों में "निक्टिटेटिंग मेम्ब्रेन" नामक सुरक्षात्मक परत होती है। यह परत पूरी तरह इंसानी पलकों जैसी नहीं होती, लेकिन सुरक्षा प्रदान करती है। हालांकि, सामान्यतः मछलियां पलक झपकाने में सक्षम नहीं होती है।

प्रकृति में हर जीव अपने वातावरण के अनुसार विकसित होता है। इसे वैज्ञानिक भाषा में "अनुकूलन" (Adaptation) कहा जाता है। मछलियों का पूरा जीवन पानी में बीतता है। उनके शरीर की बनावट, सांस लेने की प्रणाली (गलफड़े), तैरने के लिए पंख और आंखों की संरचना-सब कुछ पानी के अनुरूप है। चूंकि पानी लगातार उनकी आंखों को नम रखता है, इसलिए पलकों की आवश्यकता कभी विकसित ही नहीं हुई। अगर मछलियों को जमीन पर रखा जाए, तो उनकी आंखें सूख सकती हैं क्योंकि वे हवा के लिए अनुकूलित नहीं हैं।

पानी में धूल-मिट्टी जैसी समस्या कम होती है। साथ ही, उनकी आंखों की बाहरी परत मजबूत होती है। कुछ मछलियों की आंखों के आसपास की त्वचा मोटी होती है, जो अतिरिक्त सुरक्षा देती है। इस तरह वे बिना पलक झपकाए भी सुरक्षित रहती हैं।

मछलियों की आंखें बंद न होना कोई रहस्य नहीं है, बल्कि प्रकृति की अद्भुत योजना का उदाहरण है। चूंकि वे हमेशा पानी में रहती हैं, उनकी आंखों को सूखने या धूल से बचाने के लिए पलकों की आवश्यकता नहीं होती है। पानी ही उनकी आंखों को नम और सुरक्षित रखता है। वे सोती भी हैं, लेकिन आंखें खुली रखकर। यह सब उनकी जलीय जीवन-शैली के अनुसार विकसित अनुकूलन है। प्रकृति का हर जीव अपने वातावरण के अनुसार बना है, और मछलियों की खुली आंखें यह सिखाती हैं कि जीवन में अनुकूलन ही अस्तित्व की कुंजी है।

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