एक सशक्त सामाजिक कहानी है - फिल्म ‘चिरैया’

Jitendra Kumar Sinha
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ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इन दिनों ऐसी फिल्मों की संख्या बढ़ रही है जो केवल मनोरंजन ही नहीं, बल्कि समाज के गंभीर मुद्दों को भी सामने लाती हैं। इसी कड़ी में नई फिल्म ‘चिरैया’ एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषय को उठाती है। यह फिल्म न सिर्फ एक महिला की व्यक्तिगत पीड़ा को दर्शाती है, बल्कि समाज में व्याप्त घरेलू हिंसा और वैवाहिक शोषण जैसे मुद्दों पर भी गहरी चोट करती है।


‘चिरैया’ की कहानी कमलेश नाम की एक महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार दिव्या वत्ता ने निभाया है। कमलेश एक आदर्श बहू के रूप में अपने परिवार की हर जिम्मेदारी को निभाती है। वह चुपचाप हर परिस्थिति को सहन करती है, क्योंकि उसे बचपन से यही सिखाया गया है कि परिवार की इज्जत सबसे ऊपर होती है। लेकिन उसकी जिन्दगी अचानक तब बदल जाती है जब उसे अपने ही घर में हो रहे अन्याय का सामना करना पड़ता है। एक ऐसी घटना सामने आती है जो न केवल उसकी आत्मा को झकझोर देती है, बल्कि उसे एक कठिन निर्णय लेने पर मजबूर कर देती है, क्या वह चुप रहे या अन्याय के खिलाफ आवाज उठाए?


फिल्म का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह मैरिटल रेप (वैवाहिक बलात्कार) और घरेलू हिंसा जैसे संवेदनशील विषयों को बेहद साहस के साथ उठाती है। भारतीय समाज में ये मुद्दे अक्सर दबा दिए जाते हैं या उन्हें ‘घरेलू मामला’ कहकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। ‘चिरैया’ इन विषयों को बिना किसी लाग-लपेट के सामने लाती है। यह दिखाती है कि कैसे एक महिला अपनी ही चारदीवारी में असुरक्षित हो सकती है और किस तरह समाज और परिवार की सोच उसे बोलने से रोकती है।


फिल्म में दिव्या वत्ता ने कमलेश के किरदार को बेहद संवेदनशीलता और सच्चाई के साथ निभाया है। उनके अभिनय में एक साधारण महिला की असाधारण ताकत झलकती है। इसके अलावा, संजय मिश्रा, सिद्धार्थ शॉ और प्रसन्ना बिष्ट जैसे कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों में जान डाल दी है। खासकर संजय मिश्रा का अभिनय हमेशा की तरह प्रभावशाली और यादगार है।


फिल्म का निर्देशन शांत शाह ने किया है, जिन्होंने इस संवेदनशील विषय को बहुत ही संतुलित तरीके से प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहानी को बिना अनावश्यक नाटकीयता के, वास्तविकता के करीब रखते हुए पेश किया है। निर्देशक ने यह सुनिश्चित किया है कि दर्शक केवल कहानी न देखें, बल्कि उसे महसूस करें। फिल्म की सादगी ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है।


‘चिरैया’ केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि एक संदेश है। चुप्पी तोड़ने का संदेश। यह दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक महिलाएं अपने साथ हो रहे अत्याचार को सहती रहेंगी? फिल्म यह भी बताती है कि न्याय के लिए आवाज उठाना आसान नहीं होता, लेकिन यह जरूरी है। यह उन सभी महिलाओं को प्रेरित करती है जो किसी न किसी रूप में शोषण का सामना कर रही हैं। यह फिल्में समाज के वास्तविक मुद्दों को उजागर करती हैं, तो ‘चिरैया’ एक बेहतरीन विकल्प है। यह फिल्म न केवल लोगों को भावुक करेगी, बल्कि उनके भीतर एक नई सोच भी पैदा करेगी।


ओटीटी प्लेटफॉर्म पर ‘चिरैया’ एक ऐसी फिल्म के रूप में सामने आई है जो मनोरंजन के साथ-साथ समाज को आईना भी दिखाती है। यह उन आवाजों को सामने लाने की कोशिश है जो अक्सर दबा दी जाती हैं। ‘चिरैया’ एक सशक्त, संवेदनशील और जरूरी फिल्म है, जिसे हर किसी को एक बार जरूर देखना चाहिए, क्योंकि यह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि एक सच्चाई है।



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