फ्लाइट कैंसिल होने पर राहत - अब रिफंड या क्रेडिट शेल का फैसला यात्रियों के हाथ में होगा

Jitendra Kumar Sinha
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हवाई यात्रा के दौरान फ्लाइट कैंसिल होना यात्रियों के लिए सबसे बड़ी परेशानी में से एक होता है। इससे न केवल यात्रा की योजना बिगड़ती है, बल्कि पैसों की वापसी को लेकर भी अनिश्चितता बनी रहती है। लंबे समय तक यात्रियों को यह स्पष्ट नहीं होता था कि उनका रिफंड कब मिलेगा या मिलेगा भी या नहीं। लेकिन अब इस समस्या के समाधान के लिए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने नए नियम लागू किए हैं, जो यात्रियों को अधिक अधिकार और सुविधा प्रदान करते हैं।


डीजीसीए द्वारा जारी नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, अब फ्लाइट कैंसिल होने की स्थिति में यात्री खुद तय करेंगे कि उन्हें टिकट का पैसा वापस चाहिए या वे उसे “क्रेडिट शेल” के रूप में रखना चाहते हैं। रिफंड का विकल्प-  यदि यात्री नकद रिफंड चाहता है, तो एयरलाइन को 7 दिनों के भीतर पूरा पैसा लौटाना होगा। क्रेडिट शेल का विकल्प- यदि यात्री भविष्य में यात्रा करने का विकल्प चुनता है, तो टिकट की राशि को एक वाउचर या क्रेडिट शेल में बदला जा सकता है। यह निर्णय पूरी तरह से यात्री की सहमति पर आधारित होगा, एयरलाइन इसे थोप नहीं सकती।


अक्सर यात्री ऑनलाइन पोर्टल या ट्रैवल एजेंट के माध्यम से टिकट बुक करते हैं। ऐसे मामलों में रिफंड प्रक्रिया और जटिल हो जाती थी। लेकिन नए नियमों के तहत यदि टिकट एजेंट या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से खरीदी गई है, तब भी एयरलाइन ही रिफंड की जिम्मेदार होगी। ऐसे मामलों में एयरलाइन को 14 दिनों के भीतर रिफंड पूरा करना होगा। इससे यात्रियों को एजेंट और एयरलाइन के बीच उलझने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


क्रेडिट शेल एक प्रकार का वाउचर होता है, जिसे यात्री भविष्य की यात्रा के लिए उपयोग कर सकता है। इसमें टिकट की राशि सुरक्षित रहती है और यात्री अपनी सुविधा अनुसार नई यात्रा बुक कर सकता है। भविष्य की यात्रा के लिए पैसे सुरक्षित रहते हैं। कभी-कभी एयरलाइन अतिरिक्त लाभ या ऑफर भी देती हैं। तुरंत रिफंड का इंतजार नहीं करना पड़ता है। लेकिन एक निश्चित समय सीमा के भीतर ही उपयोग करना होता है। यदि योजना बदल जाए तो पैसा फंस सकता है। इसलिए यात्री को अपनी परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेना चाहिए।


इन नए नियमों से यात्रियों के अधिकार पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत हुए हैं। पहले कई एयरलाइंस यात्रियों पर क्रेडिट शेल लेने का दबाव डालती थी या रिफंड में अनावश्यक देरी करती थी। लेकिन अब पारदर्शिता बढ़ेगी। रिफंड प्रक्रिया तय समय सीमा में होगी। यात्री की सहमति को प्राथमिकता मिलेगी। यह बदलाव खासकर उन यात्रियों के लिए राहत भरा है, जो अक्सर बिजनेस या जरूरी कारणों से यात्रा करते हैं।


नए नियमों के लागू होने के बाद एयरलाइंस की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। अब उन्हें समय पर रिफंड प्रक्रिया पूरी करनी होगी। यात्रियों को स्पष्ट जानकारी देनी होगी। किसी भी प्रकार की जबरदस्ती या भ्रम की स्थिति से बचना होगा। यदि एयरलाइन इन नियमों का पालन नहीं करती है, तो उस पर कार्रवाई भी की जा सकती है।


फ्लाइट कैंसिलेशन जैसी स्थिति में अब यात्रियों को असहाय महसूस करने की जरूरत नहीं है। डीजीसीए के नए नियमों ने उन्हें यह अधिकार दिया है कि वे अपनी सुविधा के अनुसार रिफंड या क्रेडिट शेल का विकल्प चुन सकें। यह कदम न केवल हवाई यात्रा को अधिक पारदर्शी बनाएगा, बल्कि यात्रियों के विश्वास को भी मजबूत करेगा। आने वाले समय में यह उम्मीद की जा सकती है कि एयरलाइंस और यात्रियों के बीच संबंध और बेहतर होंगे और यात्रा का अनुभव पहले से अधिक सहज और सुरक्षित बनेगा।



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