बिहार सरकार ने राज्य के सरकारी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षा के साथ-साथ कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के तहत समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत राज्य के लगभग 10 हजार विद्यालयों को वाद्य यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इस योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित न रखते हुए उन्हें संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जोड़ना है।
वर्तमान में 9360 सरकारी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय राज्य में संचालित हैं। इन सभी विद्यालयों को चरणबद्ध तरीके से वाद्य यंत्र उपलब्ध कराए जा रहे हैं, ताकि छात्र-छात्राएं विद्यालय स्तर पर संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग ले सकें।
यह पहल केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त कार्यक्रम समग्र शिक्षा अभियान के तहत लागू की जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना और विद्यार्थियों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है।
इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने विद्यालयों में संगीत शिक्षा को प्रोत्साहित करने का निर्णय लिया है। वाद्य यंत्रों की उपलब्धता से विद्यार्थियों को संगीत सीखने और सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा।
विद्यालयों में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों, जैसे प्रार्थना सभा, राष्ट्रीय पर्व, सांस्कृतिक समारोह, वार्षिक उत्सव और प्रतियोगिताओं में इन वाद्य यंत्रों का उपयोग किया जाएगा। इससे विद्यालयों का वातावरण अधिक रचनात्मक और जीवंत बनेगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सज्जन आर ने इस संबंध में गुरुवार को राज्य के सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को वित्तीय वर्ष 2025-26 में समग्र शिक्षा के तहत वाद्य यंत्र उपलब्ध कराए जाएं।
जिला शिक्षा पदाधिकारियों को यह भी कहा गया है कि वे अपने-अपने जिलों में विद्यालयों की स्थिति की समीक्षा करें और यह सुनिश्चित करें कि जहां वाद्य यंत्र उपलब्ध नहीं हुए हैं, वहां जल्द से जल्द उनकी व्यवस्था की जाए।
इसके साथ ही विद्यालयों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वाद्य यंत्रों का उपयोग केवल औपचारिकता के लिए न होकर नियमित शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों में किया जाए।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत और कला का विद्यार्थियों के मानसिक और भावनात्मक विकास में महत्वपूर्ण योगदान होता है। जब विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ संगीत, नृत्य और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेते हैं, तो उनकी रचनात्मकता और आत्मविश्वास दोनों बढ़ते हैं।
विद्यालयों में वाद्य यंत्र उपलब्ध होने से छात्रों को बचपन से ही संगीत की समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा। कई विद्यार्थी ऐसे होते हैं जिनमें संगीत की प्रतिभा होती है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उन्हें अवसर नहीं मिल पाता है। यह पहल ऐसे प्रतिभाशाली छात्रों के लिए एक बड़ा मंच साबित हो सकती है।
वाद्य यंत्रों की उपलब्धता से विद्यालयों में सांस्कृतिक गतिविधियों को नया बल मिलेगा। प्रार्थना सभा में संगीत के साथ भजन या राष्ट्रगीत प्रस्तुत किए जा सकेंगे। राष्ट्रीय पर्वों जैसे स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के अवसर पर भी विद्यार्थियों की प्रस्तुति अधिक आकर्षक हो सकेगी।
इसके अलावा विभिन्न अंतर-विद्यालय प्रतियोगिताओं में भी छात्र-छात्राएं बेहतर प्रदर्शन कर सकेंगे। इससे विद्यालयों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी और विद्यार्थियों की प्रतिभा को मंच मिलेगा।
बिहार सरकार की यह पहल शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आज के समय में शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है।
वाद्य यंत्रों की उपलब्धता से विद्यालयों में रचनात्मक माहौल बनेगा और छात्र-छात्राएं पढ़ाई के साथ-साथ कला और संस्कृति के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना सकेंगे।
राज्य के लगभग 10 हजार सरकारी माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों को वाद्य यंत्र उपलब्ध कराने की यह योजना शिक्षा को अधिक समग्र और प्रभावी बनाने की दिशा में एक सराहनीय प्रयास है। इससे विद्यार्थियों को संगीत सीखने का अवसर मिलेगा, उनकी रचनात्मकता बढ़ेगी और विद्यालयों में सांस्कृतिक वातावरण मजबूत होगा।
यदि इस योजना का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन किया जाता है, तो आने वाले समय में यह पहल न केवल शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाएगी बल्कि राज्य में संगीत और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को भी नई पहचान दिलाएगी।
