अस्सी एक प्रभावशाली कोर्टरूम ड्रामा फिल्म है, जो समाज, न्याय व्यवस्था और महिला संघर्ष के जटिल पहलुओं को संवेदनशीलता और यथार्थ के साथ प्रस्तुत करती है। थिएटर में रिलीज होने के बाद अब यह फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जिससे इसे व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचने का मौका मिला है। निर्देशक अनुभव सिन्हा ने इस फिल्म के माध्यम से एक ऐसी कहानी को सामने रखा है, जो न केवल व्यक्तिगत संघर्ष की दास्तान है, बल्कि हमारे समाज की गहरी सच्चाइयों को भी उजागर करती है।
फिल्म की कहानी दिल्ली में रहने वाली एक मलयाली शिक्षिका परिमा के इर्द-गिर्द घूमती है। परिमा एक साधारण महिला है, जिसकी जिन्दगी अचानक एक ऐसे मोड़ पर आ जाती है, जहां उसे अपने अस्तित्व, सम्मान और न्याय के लिए लड़ाई लड़नी पड़ती है। इस कठिन यात्रा में उसका साथ देते हैं वकील रावी, जो न केवल उसका केस लड़ते हैं, बल्कि उसे मानसिक और भावनात्मक मजबूती भी प्रदान करते हैं।
कहानी का मूल संघर्ष उस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ है, जिसमें अक्सर पीड़िता को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है। फिल्म यह दिखाती है कि कैसे समाज और कानूनी तंत्र कई बार सच्चाई को नजरअंदाज कर देते हैं और पीड़ित को ही दोषी ठहराने की कोशिश करते हैं। परिमा को न केवल अदालत में अपने पक्ष को साबित करना है, बल्कि उसे समाज की उन धारणाओं से भी लड़ना पड़ता है, जो महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रह से भरी होती हैं।
फिल्म में परिमा के सामने आने वाली चुनौतियों को बेहद वास्तविक तरीके से दर्शाया गया है। अदालत की कार्यवाही, वकीलों की बहस, सबूतों की कमी और विरोधी पक्ष की रणनीतियां, ये सभी तत्व कहानी को रोमांचक और भावनात्मक बनाते हैं। खासतौर पर बचाव पक्ष की टीम द्वारा अपनाई गई रणनीतियां यह दिखाती हैं कि कैसे सच्चाई को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है, ताकि अपराधी बच सके।
अभिनय की बात करें तो कानी कुसरुति ने परिमा के किरदार में जान डाल दी है। उनका अभिनय बेहद सहज और प्रभावशाली है, जो दर्शकों को उनके संघर्ष से जोड़ देता है। तापसी पन्नू, रेवती, मोहम्मद जीशान अय्यूब, मनोज पाहवा और कुमुद मिश्रा जैसे अनुभवी कलाकारों ने भी अपने-अपने किरदारों को बखूबी निभाया है। सभी कलाकारों की सामूहिक प्रस्तुति फिल्म को और अधिक सशक्त बनाती है।
निर्देशक अनुभव सिन्हा की खासियत रही है कि वे हमेशा सामाजिक मुद्दों पर आधारित फिल्में बनाते हैं, और अस्सी भी इस परंपरा को आगे बढ़ाती है। उन्होंने कहानी को बिना किसी अनावश्यक नाटकीयता के प्रस्तुत किया है, जिससे फिल्म की गंभीरता और विश्वसनीयता बनी रहती है। फिल्म का स्क्रीनप्ले कसा हुआ है और संवाद प्रभावशाली हैं, जो दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ते हैं।
सिनेमेटोग्राफी और बैकग्राउंड स्कोर भी फिल्म के मूड को मजबूती देते हैं। अदालत के दृश्यों को इस तरह फिल्माया गया है कि दर्शक खुद को उस माहौल का हिस्सा महसूस करते हैं। बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी की गंभीरता को बढ़ाता है, लेकिन कहीं भी हावी नहीं होता।
अस्सी सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि एक सामाजिक टिप्पणी भी है, जो दर्शकों को सोचने पर मजबूर करती है। यह फिल्म हमें यह सवाल पूछने पर विवश करती है कि क्या हमारी न्याय व्यवस्था वास्तव में निष्पक्ष है, और क्या समाज महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलने के लिए तैयार है।
अस्सी एक ऐसी फिल्म है जो अपने विषय, अभिनय और निर्देशन के कारण लंबे समय तक याद रखी जाएगी। यह फिल्म न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि एक महत्वपूर्ण संदेश भी देती है।
