सड़कों पर सुरक्षा की नई पहल - जोखिम वाले स्थानों पर लगेगा आइटीएमएस

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने और यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित एवं आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। परिवहन विभाग ने राज्यभर के लगभग 700 चिन्हित जोखिम वाले स्थानों, जिनमें प्रमुख चौक-चौराहे और हाई-रिस्क कॉरिडोर शामिल हैं, पर इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह पहल न केवल दुर्घटनाओं में कमी लाने का प्रयास है, बल्कि यातायात प्रबंधन को तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।


इस परियोजना को लागू करने के लिए 28 अप्रैल को विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ परामर्श किया जाएगा। इस बैठक में परियोजना की रूपरेखा, कार्यान्वयन की प्रक्रिया और विभिन्न एजेंसियों के समन्वय पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।


आईटीएमएस एक अत्याधुनिक प्रणाली है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीकों का उपयोग करती है। इसके अंतर्गत कई महत्वपूर्ण सुविधाएं शामिल हैं, जैसे ई-चालान प्रणाली, अनुकुली (एडैप्टिव) यातायात नियंत्रण, घटना पहचान (इंसीडेंट डिटेक्शन), निगरानी (सर्विलांस) और चेहरे की पहचान प्रणाली। इन सभी तकनीकों के समन्वय से यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर तुरंत कार्रवाई संभव हो सकेगी।


ई-चालान प्रणाली के माध्यम से ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वचालित रूप से चालान जारी किया जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होगी। वहीं, अनुकुली यातायात नियंत्रण प्रणाली ट्रैफिक के दबाव के अनुसार सिग्नल के समय को स्वतः समायोजित करेगी, जिससे जाम की समस्या को कम किया जा सकेगा।


घटना पहचान प्रणाली सड़क पर होने वाली दुर्घटनाओं, अवरोधों या अन्य आपात स्थितियों का तुरंत पता लगाकर संबंधित अधिकारियों को सूचित करेगी। इससे त्वरित प्रतिक्रिया संभव होगी और राहत एवं बचाव कार्यों में तेजी आएगी। निगरानी प्रणाली के तहत हाई-रिजोल्यूशन कैमरों के माध्यम से चौबीसों घंटे सड़कों की निगरानी की जाएगी, जिससे सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी।


चेहरे की पहचान प्रणाली का उपयोग अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग में भी किया जा सकेगा, जिससे कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में मदद मिलेगी। इसके अलावा, इस प्रणाली के जरिए राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों पर वाहनों की ट्रैकिंग और निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकेगी।


विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की तकनीकी पहल से सड़क सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार होगा। भारत में हर साल लाखों सड़क दुर्घटनाएं होती हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोगों की जान चली जाती है। ऐसे में आईटीएमएस जैसी स्मार्ट प्रणाली इन दुर्घटनाओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।


इस परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय, पर्याप्त बजट और तकनीकी दक्षता सुनिश्चित करना आवश्यक होगा। साथ ही, आम जनता को भी यातायात नियमों के प्रति जागरूक और जिम्मेदार बनाना होगा। बिहार सरकार की यह पहल राज्य को स्मार्ट और सुरक्षित यातायात व्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ाने का एक सराहनीय प्रयास है। यदि इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह न केवल दुर्घटनाओं में कमी लाएगा, बल्कि नागरिकों के जीवन को भी अधिक सुरक्षित और सुगम बनाएगा।



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