ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट होने का बना नया कीर्तिमान

Jitendra Kumar Sinha
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आधुनिक समय में युद्ध केवल सीमाओं और हथियारों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सूचना, तकनीक और संचार के क्षेत्र तक भी फैल चुका है। आज किसी देश की डिजिटल संरचना को ठप कर देना भी एक तरह का रणनीतिक हथियार बन चुका है। इसी परिप्रेक्ष्य में ईरान में चल रहा इंटरनेट ब्लैकआउट वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गया है।


इंटरनेट मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks के अनुसार, ईरान में पिछले 37 दिनों से इंटरनेट पूरी तरह बंद है। 28 फरवरी को ईरान ने वैश्विक इंटरनेट से अपना संपर्क काट लिया था, और अब यह बंदी 864 घंटे से भी अधिक समय तक जारी है। यह किसी भी देश में अब तक की सबसे लंबी “राष्ट्रीय स्तर की इंटरनेट शटडाउन” मानी जा रही है।


यह अभूतपूर्व कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरान का सैन्य तनाव संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल के साथ चरम पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध के दौरान सूचना के प्रवाह को नियंत्रित करना सरकारों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाता है। इंटरनेट बंद कर देने से न केवल बाहरी दुनिया से संपर्क टूटता है, बल्कि आंतरिक विरोध और सूचनाओं के प्रसार पर भी नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है।


इतने लंबे समय तक इंटरनेट का बंद रहना आम लोगों के जीवन को बुरी तरह प्रभावित करता है। आज के डिजिटल युग में बैंकिंग, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, व्यापार और संचार, सब कुछ इंटरनेट पर निर्भर है। ऑनलाइन कक्षाएं ठप हो गई हैं।  ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान प्रणाली बाधित हैं। टेलीमेडिसिन सेवाएं प्रभावित हुई हैं। परिवार और मित्रों से संपर्क टूट गया है। इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और सामाजिक ढांचे पर पड़ रहा है।


सरकारें अक्सर इंटरनेट बंदी को “राष्ट्रीय सुरक्षा” के नाम पर सही ठहराती हैं। ईरान का भी यही तर्क है कि बाहरी हस्तक्षेप और साइबर हमलों से बचाव के लिए यह कदम जरूरी है। लेकिन मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यह कदम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सूचना के अधिकार का उल्लंघन है।


दुनिया भर के डिजिटल अधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस लंबे इंटरनेट ब्लैकआउट पर चिंता जताई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रवृत्ति खतरनाक है, क्योंकि इससे सरकारों को नागरिकों पर अधिक नियंत्रण का अवसर मिलता है। अगर इस तरह की घटनाएं बढ़ती हैं, तो यह वैश्विक डिजिटल स्वतंत्रता के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।


ईरान में इंटरनेट बंदी यह स्पष्ट संकेत देती है कि आने वाले समय में युद्ध केवल मिसाइलों और टैंकों से नहीं, बल्कि डेटा, नेटवर्क और सूचना के जरिए भी लड़े जाएंगे। डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर अब किसी भी देश की ताकत और कमजोरी दोनों बन चुका है। इस घटना ने यह भी साबित कर दिया है कि इंटरनेट अब केवल एक सुविधा नहीं है, बल्कि जीवन का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। ऐसे में किसी देश का लंबे समय तक इंटरनेट से कट जाना केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि मानवीय, आर्थिक और सामाजिक संकट भी है।



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