कमीशन विवाद पर गुस्सा - पटना में कैब ड्राइवरों का आंदोलन तेज

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार की राजधानी पटना में कैब ड्राइवरों के बीच असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। कैब एग्रीगेटर कंपनियों द्वारा वसूले जा रहे भारी कमीशन के खिलाफ अब ड्राइवर खुलकर सड़कों पर उतरने की तैयारी में हैं। रविवार को जीपीओ स्थित मैदान में बिहार प्रदेश टैक्सी यूनियन द्वारा आयोजित महासभा में बड़ी संख्या में कैब और बाइक टैक्सी चालकों ने हिस्सा लिया और अपनी नाराजगी जाहिर की।


महासभा में शामिल ड्राइवरों का कहना था कि Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियां उनसे अत्यधिक कमीशन वसूल रही हैं। उनका आरोप है कि पहले जहां कमीशन दर अपेक्षाकृत कम थी, वहीं अब यह लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ रहा है। ड्राइवरों के अनुसार, बढ़ती महंगाई, ईंधन की कीमतों में इजाफा और वाहन के रखरखाव के खर्च के बीच इतना अधिक कमीशन देना उनके लिए आर्थिक रूप से मुश्किल हो गया है।


रविवार को आयोजित इस महासभा में ड्राइवरों ने एकजुट होकर कंपनियों की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। जीपीओ परिसर में जुटे सैकड़ों ड्राइवरों ने नारेबाजी की और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। यूनियन के नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों को जल्द नहीं माना गया, तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन शुरू करेंगे। इस दौरान कई ड्राइवरों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि दिनभर काम करने के बावजूद उनकी कमाई में कोई खास वृद्धि नहीं हो रही है, बल्कि कमीशन के कारण उनकी आमदनी लगातार घटती जा रही है।


महासभा में ड्राइवरों ने कुछ प्रमुख मांगें रखी है, जिसमें शामिल हैं कंपनियों द्वारा वसूले जा रहे कमीशन में कमी, पारदर्शी किराया प्रणाली लागू करना, ड्राइवरों के लिए न्यूनतम आय की गारंटी और ईंधन कीमतों के अनुसार किराया तय करना। ड्राइवरों का कहना है कि जब तक इन मांगों पर विचार नहीं किया जाएगा, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।


कैब ड्राइवरों के अनुसार, यह पेशा अब पहले जितना लाभदायक नहीं रह गया है। पहले जहां ड्राइवर इस काम से अच्छा मुनाफा कमा लेते थे, वहीं अब बढ़ते खर्च और कमीशन के चलते उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कई ड्राइवरों ने यह भी कहा कि उन्हें अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में दिक्कत हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस समस्या का समाधान जल्द नहीं निकाला गया, तो इससे शहर की परिवहन व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है।


अभी तक Ola, Uber और Rapido की ओर से इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आमतौर पर ये कंपनियां अपने प्लेटफॉर्म के संचालन, तकनीकी सेवाओं और ग्राहक सुविधा के लिए कमीशन वसूलने की बात कहती हैं।


यूनियन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि कंपनियों ने जल्द ही कमीशन घटाने और अन्य मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो वे हड़ताल और बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। इससे शहर में कैब सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।


पटना में कैब ड्राइवरों का यह आंदोलन केवल कमीशन का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह उनके जीवनयापन और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा हुआ है। यदि कंपनियां और प्रशासन मिलकर इस समस्या का समाधान नहीं निकालते, तो आने वाले समय में यह विवाद और भी गहरा सकता है। फिलहाल, सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कंपनियां ड्राइवरों की मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं और यह आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।



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