ओडिशा में धार्मिक पर्यटन को मिलेगी रफ्तार - “जगन्नाथ धाम से सूर्य मंदिर तक चलेगी ट्रेन”

Jitendra Kumar Sinha
0

 


तटीय ओडिशा में रेल संपर्क को मजबूत करने और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा देने के उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने पुरी-कोणार्क रेल लाइन परियोजना पर काम तेज कर दिया है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना राज्य के दो प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्रों को सीधे जोड़ने जा रही है। इसके पूरा होने के बाद श्रद्धालु और पर्यटक भगवान जगन्नाथ की नगरी पुरी से विश्व प्रसिद्ध सूर्य मंदिर कोणार्क तक रेल यात्रा का आनंद ले सकेंगे। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना केवल परिवहन सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे क्षेत्र के आर्थिक और पर्यटन विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।


प्रस्तावित पुरी-कोणार्क रेल लाइन को भुवनेश्वर, पुरी और कोणार्क को जोड़ने वाले तटीय रेल त्रिकोण का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। यह त्रिकोण राज्य के तीन प्रमुख पर्यटन और सांस्कृतिक स्थलों को आपस में जोड़ेगा। अब तक इन क्षेत्रों के बीच सड़क मार्ग पर निर्भरता अधिक रही है। रेल सेवा शुरू होने के बाद यात्रा अधिक सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी। इससे लाखों यात्रियों को लाभ मिलेगा। रेलवे बोर्ड ने इस परियोजना को 19 फरवरी 2024 को मंजूरी प्रदान की थी। इसके बाद 7 मार्च 2024 को इसे विशेष रेलवे परियोजना घोषित कर दिया गया। परियोजना के विशेष दर्जा मिलने के बाद इसके कार्यों में तेजी आई है।


इस परियोजना का कार्यान्वयन ईस्ट कोस्ट रेलवे के अंतर्गत किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना के विभिन्न चरणों पर तेजी से काम चल रहा है ताकि निर्धारित समय में इसे पूरा किया जा सके। ईस्ट कोस्ट रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी दीपक राउत के अनुसार, प्रस्तावित 32 किलोमीटर लंबी पुरी-कोणार्क रेल लाइन राज्य के धार्मिक पर्यटन को नया आयाम देगी। उन्होंने कहा कि इससे देशभर और विदेशों से आने वाले पर्यटकों को काफी सुविधा मिलेगी। रेलवे प्रशासन का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी पर्यटन उद्योग के विस्तार में बड़ी भूमिका निभाती है और यही इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य भी है।


पुरी स्थित जगन्नाथ धाम देश के सबसे प्रमुख तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। हर वर्ष यहां लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। वहीं कोणार्क का सूर्य मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के कारण विश्वभर में प्रसिद्ध है। वर्तमान में पुरी से कोणार्क जाने के लिए यात्रियों को मुख्य रूप से सड़क मार्ग का उपयोग करना पड़ता है। विशेषकर त्योहारों और पर्यटन सीजन में भारी भीड़ और यातायात दबाव के कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नई रेल लाइन शुरू होने के बाद यात्रियों को कम समय में आरामदायक यात्रा की सुविधा मिलेगी। इससे धार्मिक यात्राओं के साथ-साथ पारिवारिक और सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।


रेल परियोजना का प्रभाव केवल परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग, हस्तशिल्प और छोटे व्यवसायों को भी नया अवसर मिलेगा। रेल संपर्क बढ़ने से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, जिससे स्थानीय लोगों की आय बढ़ सकती है। इसके अलावा निर्माण कार्यों के दौरान रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। तटीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास निवेश को भी आकर्षित कर सकता है, जिससे क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है।


ओडिशा लंबे समय से धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र रहा है। अब पुरी-कोणार्क रेल परियोजना इस पहचान को और मजबूत कर सकती है। रेलवे और राज्य सरकार की यह पहल केवल एक नई रेल लाइन नहीं, बल्कि पर्यटन और विकास की नई पटरी तैयार करने जैसा कदम है। आने वाले वर्षों में जब जगन्नाथ धाम से सूर्य मंदिर तक ट्रेन दौड़ेगी, तब यह यात्रा केवल दूरी कम नहीं करेगी, बल्कि आस्था, संस्कृति और विकास को भी जोड़ने का कार्य करेगी।



एक टिप्पणी भेजें

0टिप्पणियाँ

एक टिप्पणी भेजें (0)

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Ok, Go it!
To Top