सरकारी भवनों में स्थानांतरित होंगे आंगनबाड़ी केंद्र

Jitendra Kumar Sinha
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बिहार सरकार ने आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। समाज कल्याण विभाग की मंत्री डॉ श्वेता गुप्ता की अध्यक्षता में मंगलवार को आइसीडीएस निदेशालय की समीक्षा बैठक आयोजित की गयी, जिसमें राज्यभर में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति, योजनाओं की प्रगति तथा मॉनिटरिंग व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गयी। बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किराये के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को चरणबद्ध तरीके से सरकारी भवनों में स्थानांतरित करने की कार्ययोजना तैयार की जाये।


बैठक के दौरान मंत्री ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र केवल बच्चों को पोषण उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि यह मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, प्रारंभिक शिक्षा और सामाजिक जागरूकता का भी प्रमुख केंद्र हैं। ऐसे में इन केंद्रों का सुरक्षित, व्यवस्थित और स्थायी भवनों में संचालित होना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि कई आंगनबाड़ी केंद्र आज भी किराये के छोटे और असुविधाजनक भवनों में चल रहे हैं, जिससे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल पाती है। सरकारी भवनों में स्थानांतरण से इन केंद्रों की गुणवत्ता में सुधार होगा और सेवाओं का बेहतर संचालन संभव हो सकेगा।


सरकारी भवनों में आंगनबाड़ी केंद्र स्थानांतरित होने से बच्चों को स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधायुक्त वातावरण मिलेगा। अभी कई जगहों पर केंद्रों में पर्याप्त जगह, पेयजल, शौचालय और बैठने की व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव देखा जाता है। इससे बच्चों के समुचित विकास पर असर पड़ता है। नई योजना लागू होने के बाद बच्चों के लिए बेहतर कक्ष, खेल सामग्री, पोषण वितरण की सुव्यवस्थित व्यवस्था और प्रारंभिक शिक्षा के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया जा सकेगा। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बच्चों के सर्वांगीण विकास को बढ़ावा मिलेगा।


आंगनबाड़ी केंद्रों का मुख्य उद्देश्य केवल बच्चों तक सीमित नहीं है। इन केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को भी पोषण, टीकाकरण, स्वास्थ्य जांच और जागरूकता संबंधी सेवाएं प्रदान की जाती हैं। सरकारी भवनों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होने से महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने में आसानी होगी। इसके साथ ही पोषण अभियान, टीकाकरण अभियान और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों का संचालन भी अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा।


समीक्षा बैठक में आंगनबाड़ी केंद्रों की मॉनिटरिंग व्यवस्था को लेकर भी चर्चा की गयी। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केंद्रों के संचालन, पोषण वितरण और बच्चों की उपस्थिति की नियमित निगरानी सुनिश्चित की जाये। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचे, इसके लिए पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। उन्होंने तकनीकी संसाधनों के उपयोग पर भी बल दिया ताकि आंगनबाड़ी सेवाओं की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जा सके और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई हो।


सरकार की यह योजना एक साथ पूरे राज्य में लागू नहीं होगी, बल्कि इसे चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जायेगा। पहले उन केंद्रों की पहचान की जायेगी जो अत्यधिक जर्जर या अनुपयुक्त भवनों में संचालित हो रहे हैं। इसके बाद उपलब्ध सरकारी भवनों का उपयोग कर उन्हें स्थानांतरित किया जायेगा। जहां सरकारी भवन उपलब्ध नहीं होंगे, वहां नए भवन निर्माण की संभावनाओं पर भी विचार किया जायेगा। इससे आने वाले वर्षों में राज्य के अधिकांश आंगनबाड़ी केंद्र स्थायी भवनों में संचालित हो सकेंगे।


विशेषज्ञों का मानना है कि आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति में सुधार से केवल बच्चों और महिलाओं को ही लाभ नहीं मिलेगा, बल्कि ग्रामीण विकास और सामाजिक जागरूकता को भी नई गति मिलेगी। आंगनबाड़ी केंद्र गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जानकारी का प्रमुख माध्यम होते हैं। uसरकार की यह पहल महिला एवं बाल विकास के क्षेत्र में एक सकारात्मक कदम मानी जा रही है। यदि योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो इससे बच्चों के भविष्य को मजबूत आधार मिलेगा और समाज में पोषण एवं स्वास्थ्य के स्तर में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।



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