विशालता और लंबी उम्र के कारण जाने जाते हैं - “कॉर्क ओक ट्री”

Jitendra Kumar Sinha
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दुनिया में कई ऐसे पेड़-पौधे हैं जो अपनी विशेषताओं के कारण लोगों को आश्चर्यचकित कर देते हैं। कुछ पेड़ औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध हैं, तो कुछ अपनी विशालता और लंबी उम्र के कारण जाने जाते हैं। इन्हीं अद्भुत पेड़ों में एक नाम है “कॉर्क ओक ट्री” का। यह पेड़ न केवल पर्यावरण के लिए उपयोगी है, बल्कि इसकी छाल से बनने वाला कॉर्क दुनिया भर में अनेक कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी खास बात यह है कि इसकी छाल को निकालने के बाद भी पेड़ जीवित रहता है और दोबारा नई छाल उगा लेता है। यही कारण है कि इसे प्रकृति का बेहद अनोखा उपहार माना जाता है।


कॉर्क ओक ट्री मुख्य रूप से यूरोप के भूमध्यसागरीय क्षेत्रों में पाया जाता है। विशेष रूप से पुर्तगाल, स्पेन, इटली, मोरक्को और अल्जीरिया में इसकी अधिकता देखने को मिलती है। पुर्तगाल को कॉर्क उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां के विशाल जंगलों में लाखों की संख्या में कॉर्क ओक के पेड़ मौजूद हैं। यह पेड़ गर्म और शुष्क जलवायु में अच्छी तरह विकसित होता है। इसकी जड़ें गहरी होती हैं, जिससे यह कम पानी में भी लंबे समय तक जीवित रह सकता है। यही कारण है कि यह पेड़ जलवायु परिवर्तन के दौर में भी पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।


कॉर्क ओक ट्री की सबसे खास पहचान इसकी मोटी और मुलायम छाल है। इसी छाल से “कॉर्क” तैयार किया जाता है। यह छाल हल्की, लचीली और स्पंज जैसी होती है। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि जब इसकी छाल को सावधानीपूर्वक निकाला जाता है, तब भी पेड़ को कोई स्थायी नुकसान नहीं पहुंचता। कुछ वर्षों बाद इसमें फिर से नई छाल विकसित हो जाती है। एक कॉर्क ओक पेड़ लगभग 25 वर्ष की आयु के बाद उपयोगी छाल देने लगता है। इसके बाद हर 9 से 12 वर्षों के अंतराल पर इसकी छाल निकाली जा सकती है। यही वजह है कि यह पेड़ लंबे समय तक आर्थिक लाभ प्रदान करता है।


कॉर्क एक अत्यंत उपयोगी प्राकृतिक पदार्थ है। इसका प्रयोग कई उद्योगों में बड़े पैमाने पर किया जाता है। सबसे अधिक उपयोग बोतलों के ढक्कन बनाने में होता है, विशेषकर वाइन की बोतलों में। इसके अलावा इसका इस्तेमाल फर्श, दीवारों की सजावट, जूतों, बैग, हेलमेट और खेल सामग्री बनाने में भी किया जाता है। कॉर्क की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पानीरोधी और आग से सुरक्षित माना जाता है। साथ ही यह ताप और ध्वनि का अच्छा अवरोधक भी है। इसलिए आधुनिक भवन निर्माण में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। आजकल पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण प्लास्टिक के विकल्प के रूप में कॉर्क की मांग और भी बढ़ गई है। यह पूरी तरह प्राकृतिक और पुनर्चक्रण योग्य पदार्थ है, इसलिए इसे पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है।


कॉर्क ओक ट्री केवल आर्थिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पेड़ वातावरण से कार्बन डाई ऑक्साइड को बड़ी मात्रा में अवशोषित करता है। इससे वायु प्रदूषण कम होता है और जलवायु संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है। वैज्ञानिकों के अनुसार कॉर्क ओक के जंगल जैव विविधता के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। इन जंगलों में अनेक प्रकार के पक्षी, जीव-जंतु और वनस्पतियां निवास करती हैं। कुछ दुर्लभ प्रजातियां तो केवल इन्हीं क्षेत्रों में पाई जाती हैं। इसके अलावा यह पेड़ मिट्टी के कटाव को रोकने में भी मदद करता है। इसकी मजबूत जड़ें मिट्टी को बांधे रखती हैं, जिससे भूमि की उर्वरता बनी रहती है।


कॉर्क ओक ट्री की आयु बहुत लंबी होती है। यह पेड़ लगभग 150 से 250 वर्षों तक जीवित रह सकता है। कुछ पेड़ तो इससे भी अधिक पुराने पाए गए हैं। लंबे समय तक जीवित रहने के कारण यह कई पीढ़ियों तक पर्यावरण और मानव समाज को लाभ पहुंचाता रहता है। इसकी देखभाल भी अपेक्षाकृत आसान होती है। यही कारण है कि यूरोप के कई देशों में इसे संरक्षित किया जाता है और बड़े पैमाने पर इसके जंगल विकसित किए जाते हैं।


कॉर्क ओक ट्री यह साबित करता है कि प्रकृति मानव को केवल संसाधन ही नहीं देती, बल्कि सतत विकास का मार्ग भी दिखाती है। इसकी छाल को बिना पेड़ काटे प्राप्त किया जा सकता है, जो पर्यावरण संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और वनों की कटाई जैसी समस्याओं से जूझ रही है, तब कॉर्क ओक जैसे पेड़ हमें प्रकृति के महत्व को समझने की प्रेरणा देते हैं। यह पेड़ न केवल धरती को हरा-भरा बनाता है, बल्कि मानव जीवन को भी कई प्रकार से समृद्ध करता है।



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