महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव: 16 सीटों पर 18 जून को होगा मतदान

Jitendra Kumar Sinha
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महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर चुनावी हलचल तेज हो गई है। चुनाव आयोग ने राज्य की विधान परिषद की 16 स्थानीय निकाय सीटों के लिए द्विवार्षिक चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी है। आयोग के अनुसार, इन सीटों पर 18 जून को मतदान कराया जाएगा, जबकि मतों की गिनती 22 जून को होगी। चुनावी कार्यक्रम के ऐलान के साथ ही राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है और उम्मीदवारों के चयन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।


यह चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कई सीटें लंबे समय से रिक्त हैं और कुछ सीटें अलग-अलग समय पर खाली हुई थी। ऐसे में इन सीटों पर नए प्रतिनिधियों के चयन से राज्य की राजनीतिक दिशा और समीकरणों पर असर पड़ सकता है।


भारत के कुछ राज्यों में विधानसभा के साथ-साथ विधान परिषद भी होती है। महाराष्ट्र उन राज्यों में शामिल है जहां द्विसदनीय व्यवस्था लागू है। विधान परिषद राज्य विधानमंडल का उच्च सदन माना जाता है। इसके सदस्य विभिन्न माध्यमों से चुने जाते हैं, जिनमें स्थानीय निकाय, शिक्षक, स्नातक और विधानसभा सदस्य शामिल होते हैं। स्थानीय निकाय सीटों पर होने वाले चुनाव विशेष महत्व रखते हैं क्योंकि इनमें नगर निगम, जिला परिषद, नगर परिषद और अन्य स्थानीय निकायों के निर्वाचित सदस्य मतदान करते हैं। इसलिए इन चुनावों को स्थानीय राजनीतिक ताकत और जमीनी संगठन क्षमता की परीक्षा भी माना जाता है।


इस बार जिन 16 सीटों पर चुनाव होना है, वे राज्य के विभिन्न क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती है। इन सीटों के रिक्त होने के पीछे अलग-अलग कारण रहे है। कुछ सदस्य सेवानिवृत्त हुए, कुछ ने इस्तीफा दिया और कुछ अन्य कारणों से सीटें खाली हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सीटों का परिणाम राज्य की मौजूदा राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। महाराष्ट्र में पहले से ही गठबंधन राजनीति का दौर जारी है और विभिन्न दलों के बीच लगातार शक्ति प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। ऐसे में परिषद की सीटों पर जीत या हार भविष्य की राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावित कर सकती है।


चुनाव की घोषणा के साथ ही सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्षी दलों की सक्रियता बढ़ गई है। सभी दल अपने-अपने संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार कर रहे हैं। राजनीतिक दल ऐसे चेहरों को आगे लाने की कोशिश करेंगे जिनकी स्थानीय निकायों में मजबूत पकड़ हो।


महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। गठबंधन टूटे, नए गठबंधन बने और राजनीतिक समीकरण लगातार बदलते रहे। ऐसे में विधान परिषद चुनाव को राजनीतिक ताकत की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है। विपक्षी दल इन चुनावों के जरिए सरकार को चुनौती देने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि सत्तारूढ़ दल अपनी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करने की कोशिश करेगा।


इन चुनावों में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्थानीय निकाय प्रतिनिधियों की होगी। चूंकि स्थानीय निकाय सीटों के लिए मतदान विधायक नहीं बल्कि स्थानीय निकायों के निर्वाचित सदस्य करते हैं, इसलिए जमीनी स्तर पर राजनीतिक पकड़ और संगठन की मजबूती बहुत मायने रखती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय निकाय चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करने वाले दलों को विधान परिषद चुनाव में लाभ मिल सकता है। इसलिए राजनीतिक दल स्थानीय स्तर पर समर्थन जुटाने के प्रयासों में जुट गए हैं।


विधान परिषद चुनावों में उम्मीदवारों का चयन हमेशा चर्चा का विषय रहता है। कई बार राजनीतिक दल वरिष्ठ नेताओं, संगठन के प्रमुख चेहरों या सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखकर उम्मीदवार तय करते हैं। इस बार भी माना जा रहा है कि विभिन्न दल जातीय, क्षेत्रीय और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर उम्मीदवारों का चयन करेंगे। कुछ सीटों पर कड़े मुकाबले की संभावना भी जताई जा रही है।


18 जून को मतदान और 22 जून को मतगणना के बाद आने वाले परिणाम सिर्फ परिषद की सीटों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि राज्य की व्यापक राजनीति पर भी असर डाल सकते हैं। यदि किसी दल को अपेक्षा से अधिक सफलता मिलती है, तो इससे उसकी राजनीतिक स्थिति मजबूत हो सकती है। महाराष्ट्र की राजनीति में परिषद चुनाव अक्सर बड़े राजनीतिक संकेत देते रहे हैं। इसलिए इस बार भी सभी की नजरें इन 16 सीटों पर टिकी रहेगी। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा, प्रचार रणनीति और राजनीतिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।



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